प्रेम रस वीणा
Darmarakshaksewatrust ke tatwadhan me shrimad bhagwat katha ka aayojan . katha wakta श्री ईदानंदाचार्य गिरी ji maharaj ji ( shridham Vrindavan Barsana mathura )
katha bhagwat ke liye sampark kare
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आप देख रहे है परम पूज्य श्री ईदानंदाचार्य गिरी जी के श्री मुख से श्रीमद भागवत कथा और भजन शंध्या का प्रसारण
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सुंदरता देखनी है तो भगवान के विग्रह स्वरूप को देखिए भगवान की सुंदरता का अनुभव कीजिए
चाहे पुत्र हो चाहे पुत्री हो बिना स्वार्थ के कोई अपने माता पिता की सेवा नहीं करता ! सब स्वार्थी है
एक बार सच्चे मन से भजन करे आप भगवान आपके ऊपर प्रसन्न होंगे और भगवान की कृपा आपके ऊपर होगी
ब्रह्माजी जिसवक्त जीवको किसी मांके गर्भमें भेजतेहैं उसके पूरे जीवन का विवरण यमराजजी को सौंप देतेहैं
जिस स्थान पर आपका सम्मान ना हो वहां पर आपको नहीं जाना चाहिए
संत समागम और हरि कथा यह बहुत ही दुर्लभ निधि है सुत दारा लक्ष्मी तो सबके घर होता है
धर्म के प्रति और त्यागी बैरागी के प्रति कभी भी आपके मन में संदेह नहीं होनी चाहिए ये भक्ता अपराध है
भगवान तो कन कन में विद्यमान है परंतु उनको देखने की दृष्टि आपके पास होनी चाहिए
धर्म के विषयमें जानकारी होनी चाहिए केवल सनातनी कह देने से नहीं होता संपूर्ण जानकारी आपको होनी चाहिए
सतीमाता को अपने आपको अग्निकुंड में समर्पित करना पड़ा इसलिए महापुरुषोंके बात पर संदेह नहीं करना चाहिए
ध्रुवजी ने 5 वर्ष की उम्र में थोड़े दिनों में भगवान की भक्ति करके साक्षात भगवान का दर्शन कर लिया था
भजन मतलब भगवान के जनो या भक्तो और दिनों की सेवा होता है केवल माला जाप करना पूजा करना भजन नही होता!
सच्चे संतों भक्तों के बीच में बैठकर के आप भजन करोगे तो आप खुद भगवानकी छत्रछाया को अनुभव कर सकते हैं
भक्ति भजन करो तो भाव मे डूबकर क्योकि आपके दिखावा वाले रूप को भगवान अच्छी तरह जानते है
अनुराग मन में हो और अनुराग से भजन कीर्तन किया जाय ताकि आनंद पूर्वक भगवान को रिझाया जा सके!
एकाग्र मन से आंखें खोल करके भगवान को देखना चाहिए ताकि जो दृष्टि दोष है वह समाप्त हो जाए
प्रेम का पथ बड़ा कठिन है सच्चे प्रेम के रास्ते पर चलना आसान नहीं होता
भजन कीर्तन करें तभी भक्ति करने का पूर्ण रूप से आपको फल प्राप्त होगा और वास्तविक भक्ति आप कर पाएंगे
सच्चा प्रेम तो निःस्वर्थी भक्त और भगवान ही कर सकते हैं बाकी तो सब स्वार्थ लगाकर के प्रेम करते हैं
आरती भगवान की करते समय ध्यान पूर्वक भगवान को भी देखना चाहिए और जो ज्योति की लव है उसको देखना चाहिए
स्वर साधना से ही आप अपने मन को शांत रख सकते है !
केवल कथा सत्संग सुनने से आपका कल्याण नहीं हो सकता जब तक कि आप जीवन में उसको न उतारे
भक्ति की अनुराग में मगन होकर के भाव के साथ भगवान का जो कीर्तन भजन करता है वहीं पर भक्ति आ जाती हैं
सनातन धर्म मे ही दूसरे का सम्मान करना सिखाया जाता है बाकी तो और सब अपने को ही सबसे बड़ा बताते है !
जरूरतमंद की ही सेवा करनी चाहिए किसी नसेड़ी या झूठे को दान देना दोष और पाप है !
समय रहते हुए ही जाग जाइए और सत्य के साथ चलना प्रारंभ कर दीजिए क्योंकि क्योकि आपके पास समय कम है
सत्संग सेवा भजन कीर्तन की भूख आपके जीवन में कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए
माता पिता की सेवा सच्चे मन से निस्वार्थ भाव से जो भी पुत्र करता है वह चार धाम कर लेता है
भगवान से प्रार्थना करना चाहिए कि हमारे मन में जो बिकार है वह सदा के लिए समाप्त हो जाए
भगवान विष्णु को मायापति कहा गया है अर्थात मायापति जी विष्णु हमारे पिता है तो माया हमारी माँ हुई!