जैन मुमुक्षु प्रवचन
हम स्वयं अपने परिणामों का आँकलन कैसे करें
क्षमावाणी - दृष्टि बदलो बदले की भावना मत रखो
क्षमावाणी पर्व - धर्म का प्रारम्भ भी क्षमा से होता है और पूर्णता भी क्षमा में ही होती है
रत्नत्रय धर्म - तीन लोकों में उत्तम है रत्नत्रय धर्म
रत्नत्रय धर्म - धर्म का सच्चा स्वरुप
उत्तम ब्रम्हचर्य - ब्रम्हचर्य और ब्रम्हचारी कैसे होना चाहिए
उत्तम ब्रम्हचर्य - ब्रम्हचर्य की अद्भुत महिमा
उत्तम अकिंचन - ग्रहस्त जीवन में आकिंचन प्रगट करने का सरलतम उपाय
उत्तम अकिंचन्य -अकिंचन की महिमा आने पर अपने में सिद्धत्व की स्थापना हो जाती है
उत्तम त्याग - त्याग का मतलब है मिथ्या संकल्पों का त्याग परभावों का त्याग
उत्तम त्याग - परद्रव्यों के प्रति ममत्व बुद्धि को छोड़ना ही त्याग धर्म है
उत्तम तप - स्वाध्याय के बिना तत्व का पक्ष हो सकता है लक्ष्य नही
उत्तम तप - क्रोध का नही क्रोध के कारण का आभाव करना है
उत्तम संयम - आचार्य कहते हैं पंचम काल की भी चिंता मत करो बस पंचम भाव की तैयारी करो
उत्तम संयम - संयम का सच्चा स्वरुप
उत्तम शौंच - आज हमारा हित होगा ही होगा
उत्तम शौंच - पवित्र आत्म स्वरुप की आराधना का दिवस है
उत्तम सत्य- अपनी परिणति में मोह राग द्वेष का उत्पन्न होने में पर का दोष नही है यही त्रैकालिक सत्य है
उत्तम सत्य - सुखी रहने की अद्भुत कला का आनंद
उत्तम आर्जव - कार्य सिद्धि के लिए कपट नही पुण्य का उदय जरुरी है
उत्तम आर्जव - जीवन में सरलता लाना जरुरी है जिससे आड़ी टेढ़ी गति मिट जाएगी
उत्तम मार्दव - हमारे सर्व प्रयोजन की सिद्धि आत्मा के आश्रय से ही होगी
उत्तम मार्दव - मै जीव हूँ ऐसा समझ में आ जाए तो कठोरता अपने आप मिट जाती है
उत्तम क्षमा - आज के दिन मूल की भूल को निकाले
उत्तम क्षमा - क्रोध के आभाव को क्षमा कहते हैं
दसलक्षण धर्म क्यों और कैसे मनाए
क्या सब कुछ कर्मो के अनुसार ही हो रहा है आइये समझते हैं कर्म सिद्धांत
आत्मा का घोर विराधना का नाम है मिथ्यात्व - समयसार जी
ज्ञान की महिमा - ज्ञान इन्द्रियों से नहीं ज्ञान से ही आता है