Yashvi vora

पढ़ना नहीं हे , शिखाना हे।
इंसान ख्वाहिशों से भरा ऐक जिद्दी परिंदा ही,
उम्मीदों से ही धायल हे। और उम्मीदों पर ही जिंदा हैं।