Uttam Saheb
''उत्तम साहेब ''के इस चैनल में आपका हार्दिक स्वागत है, इस चैनल में संतो में वैज्ञानिक संत सम्राट सतगुरु कबीर साहेब जी के दर्शन के साथ साथ विश्व के समस्त महापुरुषों के अनमोल वचन भजन कीर्तन आप लोगों को समर्पित किया जाएगा, जो की अंधविश्वास, जात पात, छुआछूत, भेदभाव, पाखंड, रूढ़िवाद और चमत्कार आडंवरौंं से हटकर मानवता, एकता, विश्व बंधुता, इंसानियत और भाईचारे आदि का सूत्र दिया जाएगा इस सूत्र को ज्यादा से ज्यादा फैलाने के लिए सब्सक्राइब शेयर कमेंट और लाइक करें धन्यवाद ।
रमैनी (34) मोक्ष क्या है? By -uttam saheb
रमैनी (33) शास्त्रजाल का बंधन by- uttamsaheb
रमैनी (32)विवेकहिन के लिए वेद शास्त्र निरर्थक है By- Uttam Saheb
रमैनी (31) क्या धर्मशास्त्रज्ञ होने का फल अहंकार शोषण और पाखंड है? By-Uttam Saheb
रमैनी (30) अविनाशी का बोध पाखंड से बाहर है By-Uttam Saheb
भक्ति का शुरुआत कहां से करना चाहिए by-uttam saheb
यह दो सूत्र घर परिवार को स्वर्ग बना देगा By-Utttam Saheb
विवाह का वास्तविक अर्थ क्या है? By-Uttam Saheb
रमैनी (29) रजोगुण से उठकर स्वरूपज्ञान में स्थित हुओ By-Uttam Saheb
रमैनी (28) कर्मपट बिनने वाला जीव जोलाहा By-Uttam Saheb
रमैनी (27) संसार प्रकृति पुरुषमय है By- Uttam Saheb
रमैनी (26) निजस्वरूप को पहचानने वाला ही सर्वोच है By-Uttam Saheb
रमैनी (25) जिसे खोजते हो तुम श्वयं हो by-Uttam Saheb
सब माया है पूरे ब्रह्मांड में आपका कोई अपना नहीं by- uttam saheb
संत तुलसीदास जी के दृष्टि में बड़ेभागी और मूर्ख कौन है by- uttamsaheb
रमैनी (24) तुम स्वयं सर्वोच्च सत्ता हो by-uttam saheb
रमैनी (23) विषय सुख अल्प है आत्म सुख नित्य है by- uttam saheb
रमैनी (22) मोह मंदिर में मत घुसोby-uttam saheb
रमैनी (21) राम को मानने से नहीं जानने से दुख मिटेंगेby-uttamsaheb
रमैनी (20)मन के विकारों से हटकर अविनाशी राम में रामो by-uttam saheb
रमैनी (19) भ्रांति छोड़ो राम में रामो by-uttam saheb
रमैनी (18 ) संश्य पशु को मारो मुक्ति पाओ by_uttam saheb
मजा लूट ले बंदे गुरु बंदगी का (भजन) by_Uttam saheb
जीवन के बाधा मिटाने का उपाय by-barahamchari uttam saheb
रमैनी (17) तुम स्वयं महान हो अपने राम रूप का स्मरण करो by- uttamsaheb
रमैनी 15और16 अज्ञान रात्रि में मनुष्यों का भटकाव by-uttam saheb
रमैनी (14) पुरोहितों की मानवता- विरोधी व्यवस्था की भर्त्सना by- uttam saheb
रमैनी (13) निसार भोगों को त्यागो by:uttam saheb
रमैनी (12) माया से बचो by:uttam saheb