Thakurram

नित्य स्तुति प्रातःकाल सायं काल
भक्त भक्ति भगवन्त गुरु चतुर नाम वपु एक ।
इनके पद वन्दन किये नाशहिं विघ्न अनेक ।।
जय जय मीन बराह कमठ नरहरि बलि-बावन ।
परशुराम रघुवीर कृष्ण कीरति जग पावन ।।
बुद्ध कल्कि अरु व्यास पृथू हरि हंस मन्वंतर ।
यज्ञ ऋषभ हयग्रीव ध्रुव वरदैन धन्वंतर ।।
बद्रीपति दत्त कपिलदेव सनकादिक करुना करौ ।
चौबीस रूप लीला रुचिर श्री अग्रदास उर पदधरौ ।।
अंकुस अम्बर कुलिश कमल जव ध्वजा धेनुपद ।
शंख चक्र स्वस्तिक जम्बूफल कलस सुधाहृद ।।
अर्धचंद्र षटकोन मीन बिंदु ऊरधरेखा ।
अष्टकोन त्रैकोन इंद्रधनु पुरुष विशेखा ।।
सीतापति पद नित बसत एते मंगलदायका ।
चरण चिन्ह रघुवीर के संतन सदा सहायका ।।
विधि नारद शंकर सनकादिक कपिलदेव मनुभूप ।
नरहरिदास जनक भीषम बलि शुकमुनि धर्मस्वरूप ।।
अन्तरंग अनुचर हरि जू के जो इन कौ यश गावैं ।
आदि अन्त लौं मंगल तिनके श्रोता वक्ता पावै ।।
अजामेल परसंग यह निर्णय परम धर्म के जान ।
इन की कृपा और पुनि समझे द्वादस भक्त प्रधान ।।