झारखंड के मोस्ट वॉन्टेड इनामी नक्सल, पुलिस ने जारी किए नंबर । चाईबासा
Автор: News Aapka
Загружено: 2025-09-12
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गरीबी और अभाव ने जहाँ इनके बचपन को निगल लिया, वहीं भाकपा माओवादी संगठन ने इन्हें लाल झंडा और बंदूक थमा दिया ।नमस्कार न्यूज आपका । झारखंड पुलिस ने पश्चिम सिंहभूम जिले के सभी नक्सलियों की नई सूची जारी कर दी है ।तो सबसे पहले चलिए जानते हैं गोइलकेरा थाना के रहने वाले उन माओवादियों के बारे जो अभी सारंडा और कोल्हान में सक्रिय हैं। हाल के दिनों में आपने देखा होगा गोइलकेरा थाना क्षेत्र में दो बड़ी नक्सली मुठभेड़ देखने को मिला जिसमें दो नक्सली मारे गए । गोइलकेरा थाना क्षेत्र में अभी दो ईनामी नक्सली मोस्ट वांटेड हैं एक है दोकोल उर्फ सांगेन अगरिया और दूसरा है करण उर्फ डांगुर । दोनों एक ही गांव संगाजटा के रहने वाले हैं इन दोनों पर पुलिस ने गुप्त सूचना देने पर दो लाख का इनाम भी रखा है । इनके अलावा गोइलकेरा थाना क्षेत्र के अलग अलग गांव की कई युवतियां नक्सली संगठन में शामिल है पहला है मुन्नू सोरेन जो लोवा बेड़ा की रहने वाली है दूसरी है दूसरी है जिलानी उर्फ सलमि चम्पिया जिसकी फोटो में काफी कम उम्र की लग रही है और ये दुगुनिया गांव की रहने वाली है जहां हाल में मुठभेड़ देखने को मिली थी । तीसरी माओवादी है अनीशा कोड़ा उर्फ रानी जोकि तोड़ेगसाईं की रहने वाली है चौथी नक्सली है सुमित्रा सुरीन जोकि तिरिल बुरु छोटा कूईरा की रहने वाली है ये ही पूर्णिमा जोकि कदम डीहा कि रहने वाली है । ये है सोमवारि पूर्ति जोकि गोइलकेरा थाना के कासीजोआ की रहने वाली है । अब चलिए देखते हैं सोनुवा थाना क्षेत्र के रहने वाले उन माओवादियों के बारे जो अभी संगठन में सक्रिय हैं । इसमें सबसे पहला नाम आता है भुनेश्वर उर्फ सलूका कायम का जोकि कूदाबुरु का रहने वाला है और पुलिस ने इस पर 5 लाख का ईनाम रखा है ये भाकपा माओवादी संगठन में जोनल कमिटी मेंबर है ।साथ ही ये अमित मुंडा का दस्ता ने रहता है । सोनुआ थाना क्षेत्र में का दूसरा माओवादि है रिसीव उर्फ जीवरि ये माईलपि गांव का रहने वाला है हाल में हुए मुठभेड़ में भी ये शमिल था साथ ही बड़ी नक्सली घटनाओं में ये शामिल रहा है । चलिए अब देखते हैं कुछ कम उम्र के नक्सलियों को और जानते हैं कि किन परिस्थितियों में भाकपा माओवादी संगठन ये वो शामिल हुए । ये हैं माटा हेंब्रम जोकि टोंटो थाना क्षेत्र के तुंबा हाका गांव का रहने वाला है जिसकी अगर वीडियो में देखेंगे तो उम्र काफी कम है । और ये जिस इलाका का रहने वाला है दो साल पहले तक वहां माओवादियों का मुख्यालय था । सैकड़ों युवक युवती नक्सल संगठन में शामिल थे जिनमें कई लोगों ने आत्म समर्पण कर दिया ।कई लोग संगठन छोड़ भाग गए। जब मैं तुंबाहाका गांव गया तो कई लोगों से बात चित की तो उन्होंने बताया कि गांव में बैठक भाकपा माओवादी संगठन द्वारा की जाती थी और गांव से कई लड़के लड़कियों की मांग की गई जिसके कारण बहुत सारे लोग संगठन से जुड़ गए कई गांव छोड़ बाहर काम करने चले गए । तो कही न कही ये माटा हेंब्रम भी मजबूरी में नक्सल संगठन से जुड़ गया होगा ।और इस तरह से जो भी बच्चे कम उम्र के होते हैं उनको संगठन में मिलिस्या सदस्य बनाया जाता है । इसी तुंबा हाका गांव की नीति मई हेंब्रम भी नक्सली बन गई है ।इसी गांव की फूलो हेंब्रम उर्फ माई कुई नक्सली बन गई । तुंबा हाका गांव टोटो थाना क्षेत्र में पड़ता है और इस थाना क्षेत्र की बसंती देवगम जो सरजोम बुरु गांव की रहने वाली है वो भी संगठन में शामिल हो गई । मुकेश उर्फ डांगुर में इसी थाना क्षेत्र का रहने वाला संगठन में शामिल हो गया ।अब चलिए देखते हैं दूसरे राज्य पश्चिम बंगाल के बड़े माओवादियों को जो अभी पश्चिम सिंहभूम में हैं सक्रिय हैं जिसमें एक करोड़ ईनामी माओवादी का नाम मोस्ट वांटेड लिस्ट में सबसे टॉप पर है ये है मनोज दा उर्फ आकाश दा जो भाकपा माओवादी संगठन में सेंट्रल कमिटी मेंबर है और कई सालों से पश्चिम सिंहभूम के जंगलों में रह रहा है ।इसके अलावा पश्चिम बंगाल से आए नक्सलियों की बात करे जो अभी सारंडा कोल्हान में सक्रिय हैं उनमें और दो बड़े ईनामी माओवादी हैं जिसके ऊपर 15 लाख का इनाम रखा गया है वो है चरण उर्फ मदन महतो । और आसा दी उर्फ बेला सरकार । वहीं 5 लाख ईनामी तीन माओवादी समीर सोरेन पुष्पा उर्फ वर्षा और पांडे उर्फ पंड्या ये लोग अभी सारंडा जंगल में मौजूद हैं । इनके अलावा 2 लाख ईनामी माओवादी में मीना उर्फ मीरा और मालती है । वहीं एक लाख ईनामी माओवादी मीता उर्फ नयन तारा भी सारंडा में मौजूद है। समर दा और गौरी उर्फ बुलू ये भी पश्चिम सिंहभूम के रहने वाले हैं ।ये सभी लोग काफी खूंखार नक्सली हैं क्यों कि काफी लम्बे समय से बंगाल से झारखंड में आकर कई बड़ी नक्सली घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। जैसा कि आप जानते हैं नस्लवाद का जन्म नक्सलबाड़ी से हुआ जोकि पश्चिम बंगाल में है वहीं से पूरे देश में नक्सलवाद की विचार फैलने लगी और देखिए आज भी कई बड़े ईनामी नक्सली पश्चिम सिंहभूम के जंगलों में मौजूद हैं । आपको बता दे कि अभी जितने भी बड़े ईनामी माओवादी पश्चिम सिंहभूम जिले में मौजूद हैं वो दूसरे जिला और दूसरे राज्य से इस इलाके में पहुंचे हैं । सारंडा जंगल में अभी आंध्र प्रदेश के दो नक्सली मौजूद हैं पहली एक महिला नक्सली है नाम है पूनम उर्फ जोबा । दूसरा संतोष उर्फ विश्वनाथ आपके बता दे कि पश्चिम बंगाल के नक्सल आंदोलन की लहर सबसे पहले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्य में देखने को मिली थी और यहां के कई नक्सल केडर आज झारखंड और छत्तीसगढ़ में मौजूद हैं । पूनम रीजनल कमिटी मेंबर है और ये मिसिर बेसरा के दस्ते के साथ रहती है । हाल में देखा हो आपने की सारंडा जंगल से छत्तीसगढ़ का माओवादी सुकमा जिले की रहने वाली है ये हैं ।
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