IBS, Irritable bowel syndrome, Gastric symptoms due to psychological, mental problems
Автор: Dr. Sanjay Jain - Psychiatrist
Загружено: 2019-06-28
Просмотров: 548251
इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) का शाब्दिक अर्थ होता है आंतों के चिड़चिड़ेपन के लक्षण I इस बीमारी के मरीजों में पेट से संबंधित कई तरह की समस्याएं होती है जैसे अत्यधिक गैस बनना, अपच रहना, पेट फुला फुला रहना, डायरिया होना या कब्ज रहना और पेट में दर्द रहना I आईबीएस में मुख्यतः दो तरह के लक्षणों का समूह होता है -डायरिया वाले लक्षण या कब्ज वाले लक्षण, कुछ लोगों में दोनों तरह के मिक्स लक्षण भी होते हैंI इन लोगों को खाना खाने के तुरंत बाद शौच के लिए जाना पड़ता है या इनको इनकंप्लीटनेस की फीलिंग होती है जिससे यह बार-बार शौच के लिए जाते हैंI इन लोगों को गैस की वजह से डकारे आना, खाना ऊपर तक आ जाना और गैस की वजह से सिर में भारीपन रहना जैसी समस्याएं भी होती हैI
ऐसे लोग पेट के डॉक्टर के पास जाते हैं, बहुत सारी जांचें करवाते हैं जैसे एंडोस्कोपी, गैस्ट्रोस्कॉपी,सिटी स्कैन लेकिन सब जांचें नॉरमल आती है और फिर जब दवाओं से आराम नहीं मिलता है तो यह फिर से दूसरे डॉक्टर के पास जाते हैं और फिर से जांच करवाते हैं लेकिन फिर भी कुछ आराम नहीं मिलता है और इस तरह से यह कई डॉक्टर्स के चक्कर लगाते रहते हैंI
ऐसे लोगों की बीमारी की जड़ पेट में नहीं मस्तिष्क में होती हैI सामान्य भाषा में इसे ऐसे समझ सकते हैं कि एंजाइटी या डिप्रेशन की समस्या पेट के लक्षणों में परिवर्तित हो जाती हैI इन लोगों के साथ कोई ना कोई ऐसी बात होती है जो उनके अवचेतन मन में छिपी होती है और वह मनोचिकित्सक द्वारा लंबे सेशन लेने पर सामने आती है और तनाव का कोई सही समाधान नहीं होता है तो यह तनाव शारीरिक लक्षणों में परिवर्तित हो जाता है और इस तरह के पेट के लक्षण दिखाई देने लग जाते हैI
इस बीमारी के इलाज के लिए मनोचिकित्सक के पास जाना जरूरी है जोकि लंबे सेशन के बाद अवचेतन मन में छुपी हुई तनाव को पता करते हैं और फिर उसका इलाज करते हैं जिससे यह पेट की समस्या पूरी तरह से ठीक हो सकती हैI
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: