Ajmal Kasab: When BBC visited his Fareedkot's house (BBC Hindi)
Автор: BBC News Hindi
Загружено: 2018-11-26
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कसाब को फांसी की खबर आने के बाद मैं पंजाब प्रांत के फरीदकोट पहुंची जिसे कसाब का गांव कहा जाता है. मैं उस मोहल्ले में पहुंची जहां बने एक घर को कसाब का घर बताया जाता है. घर के आसपास कई लोग जमा थे. पास में कुछ दुकानें थी, वहां भी काफी भीड़ थी. वहां नौजवानों समेत कुछ लोगों से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कसाब को अपने गांव का मानने से इनकार कर दिया.
लोगों का कहना था कि हम यहीं पैदा हुए हैं, हमने यहां कसाब को कभी नहीं देखा, कसाब के नाम पर इस गांव को बदनाम किया जा रहा है. लोगों ने बताया कि उन्होंने कसाब का नाम मीडिया के जरिए ही सुना है और यहां कसाब या कसाब के खानदान का कोई शख्स नहीं रहता है. इस घर से सटी दुकान पर खड़े कुछ लोगों से जब मैंने बात की तो उन्होंने कहा कि ये पूरा ड्रामा बनाया गया है, लोग हमारे इलाके को बदनाम कर रहे हैं.उस घर के बाहर कुछ जानवर बंधे हुए थे, भीतर दाखिल होने पर देखा कि वहां कुछ महिलाएं भी थीं.
इस घर में कुछ लोग रहते हैं और ये कहा जाता है कि कसाब के खानदान के लोग बहुत पहले इस घर को छोड़कर कहीं चले गए थे और अब यहां कोई दूसरे लोग रहते हैं.
हमें देखकर घर की महिलाएं भीतर चली गईं और जब हम वहां के दृश्य को कैमरे में कैद करने लगे तो कई लोग आ गए जो हमें रोकने लगे.
उन लोगों ने कहा कि आप यहां दाखिल कैसे हुए, उन्होंने हमें फौरन बाहर निकल जाने के लिए भी कहा.
फिर हमें अपना कैमरा बंद करके घर से बाहर निकलना पड़ा, बाहर एक साहब से हमारी थोड़ी बहस भी हुई जो शायद उस इलाके के कोई बड़े आदमी थे.
गांव में वर्दी में हमें कोई सुरक्षाकर्मी नजर नहीं आया, वहां गम के माहौल जैसी कोई बात भी नजर नहीं आई, लेकिन लोगों में गुस्सा जरूर था.
स्टोरी: शुमाइला जाफ़री, बीबीसी हिन्दी, साल 2012
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