आतंकियों के कब्जे से छूटते आर्या मीरा के सामने ही लगाया अनु को गले मीरा को लगा440volt का जोरदार झटका
Автор: Amit Rajput talks
Загружено: 2026-01-26
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आतंकियों के कब्जे से छूटते आर्या मीरा के सामने ही लगाया अनु को गले मीरा को लगा440volt का जोरदार झटका
कश्मीर की उन बर्फीली वादियों में गोलियों की गूंज अब थम चुकी थी, लेकिन जज्बातों का तूफान अभी आना बाकी था। पुलिस और स्पेशल फोर्स की जवाबी कार्रवाई ने आखिरकार आतंकियों के हौसले पस्त कर दिए थे और वो घड़ी आ गई थी जिसका सबको इंतज़ार था। धुएं और धूल के गुबार के बीच से जब आर्या बाहर निकला, तो उसकी हालत खराब थी—कपड़े फटे हुए, चेहरे पर चोट के निशान और कदमों में लड़खड़ाहट। लेकिन उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे उसने मौत को हराकर ज़िंदगी जीत ली हो। वहां मौजूद हर शख्स की नजरें उसी पर टिकी थीं, लेकिन सबसे ज्यादा बेताबी मीरा की आंखों में थी। मीरा, जो अब तक अपनी जीत का सपना संजोए खड़ी थी, उसे लगा कि आज का दिन उसका है। उसने मन ही मन सोचा कि अनु तो अब तक मर चुकी होगी या डर कर भाग गई होगी, और अब आर्या को सहारा देने के लिए सिर्फ वही बची है।
जैसे ही आर्या पुलिस घेरे से बाहर आया, मीरा के चेहरे पर एक विजय मुस्कान खिल उठी। उसने अपने बालों को सवारा और दौड़कर आर्या के करीब जाने लगी। उसकी बाहें फैली थीं, मानो वह आर्या को अपने गले लगाने के लिए तैयार हो। मीरा के दिमाग में बस यही चल रहा था कि अब आर्या उसकी गोद में गिरकर रोएगा और उसका हो जाएगा। वह आर्या के बिल्कुल करीब पहुँच चुकी थी, उसके होंठों पर "आर्या..." शब्द भी आ चुका था, लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने मीरा की दुनिया ही हिला दी। आर्या ने मीरा की तरफ देखा तक नहीं। उसने मीरा को ऐसे नजरअंदाज किया जैसे वह वहां मौजूद ही न हो, जैसे उसका कोई वजूद ही न हो। मीरा का बढ़ा हुआ हाथ हवा में ही लटका रह गया और आर्या उसे चीरता हुआ आगे बढ़ गया।
मीरा हक्की-बक्की होकर पीछे मुड़ी कि आखिर आर्या जा कहाँ रहा है? और तब उसने वो मंज़र देखा जो उसके लिए किसी 440 वॉल्ट के झटके से कम नहीं था। थोड़ी दूर, पुलिस की जीप के सहारे अनु खड़ी थी—घायल, सहमी हुई, और ठंड से कांपती हुई। अनु की आंखों से आंसू बह रहे थे। आर्या ने अनु को देखते ही अपनी सारी थकान भुला दी और लड़खड़ाते कदमों से दौड़ते हुए उसके पास पहुँचा। बिना एक शब्द बोले, आर्या ने अनु को अपनी बांहों में ऐसे भर लिया जैसे कोई बिखरने से बचने के लिए आखिरी सहारा पकड़ता है। अनु भी रोते हुए आर्या के सीने से लिपट गई। उन दोनों का यह मिलन इतना भावुक और गहरा था कि वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। आर्या ने अनु के माथे को चूमा और उसकी पीठ थपथपाते हुए उसे यकीन दिलाया कि वह सुरक्षित है।
लेकिन यह नजारा मीरा के लिए मौत से भी बदतर था। उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके गाल पर जोरदार तमाचा मारा हो। जिस आर्या के लिए उसने इतनी साजिशें रचीं, आतंकियों को पैसे खिलाए, अनु को मारने का प्लान बनाया, वही आर्या आज उसकी आंखों के सामने उसकी सबसे बड़ी दुश्मन को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार कर रहा था। मीरा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। उसे अपनी दौलत, अपनी खूबसूरती और अपना रुतबा सब मिट्टी में मिलता हुआ दिखाई दिया। आर्या और अनु को एक-दूसरे की बांहों में देखकर मीरा की नफरत और जलन ने उसके सीने में आग लगा दी थी, लेकिन वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती थी। वह बस बुत बनी खड़ी रह गई, यह कड़वा सच निगलते हुए कि अनु का प्यार उसकी नफरत पर भारी पड़ गया था।
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