महाभारत भाग 30, राजमाता सत्यवती को अपने निर्णय पर होने लगी पछतावा, याद आये महाराज पांडु....
Автор: Prem-Sandesh
Загружено: 2022-08-06
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महाभारत भाग 30, राजमाता सत्यवती को अपने निर्णय पर होने लगी पछतावा, याद आया महाराज पांडु.......
वर्षो पहले राजमाता ने निर्णय लिया था, वह अपने पति महाराज शान्तनु के साथ बात चित में लिया था।
राजमाता का मानना था की मेरे पुत्र हस्तिनापुर के राज्य सिंहासन पर बैठे, भीष्म नहीं बैठे ,
ये इच्छा तो पूरा हुआ लेकिन जीवन दुखो से भर गया , अपने ही पुत्र के द्वारा उन्हें अपमान मिलने लगा ,
राजमाता को उनके जाति और कूल के नाम पर राजयसभा में अपमान किया गया।
फिर भी उनके पोता धृतराष्ट ने उनका साथ नहीं दिया।
यहाँ तक की और उन्हें अपमानित करने लगा।
यह सब सुन कर राजमाता की आँखों से आँसू नहीं रुक रहे थे।
उन्हें पुरानी निर्णय याद आने लगी , इसलिए राजमाता ने विचार किया की
हम पाण्डु के पास जायेंगे और उन्हें हस्तिनापुर वापस लाएंगे , यहाँ उसके जैसे राजा की ही ज़रूरत है।
राजमाता महामंत्री विधुर को वन जाने के लिए बोलती है विधुर को अपने साथ वन में ले जाती है।
राजमाता यह विचार से जाती है की हम पाण्डु की तपस्या पूर्ण करबाएंगे उसे मनाएंगे
और वापस हस्तिनापुर लाएंगे राज्य सम्भालने के लिए लाएँगे......................।
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