चामुंडा माता मंदिर | चोटिला माता मंदिर | चमत्कारी मंदिर | माँ चामुंडा | गुजरात | 4K | दर्शन🙏
Автор: Tilak
Загружено: 2023-08-10
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भक्तों, जय माता दी, आप सभी का तिलक परिवार की ओर से हार्दिक अभिनन्दन. भक्तों, संसार में सबसे अधिक प्रेम करने वाली माँ होती है, हमारे संतों का कहना हैं की संसार की समस्त माताओ की सारी ममता और प्यार को एक साथ इकठ्ठा किया जाये तो भगवान के प्रेम की एक बूँद के बराबर भी नहीं हो सकता, तो भक्तो सोचो भगवान हमसे कितना प्रेम करते हैं, जब वही भगवान उस प्रेममयी माँ के रूप में हमारे सामने आये तब क्या हो. इसी तरह माँ आदिशक्ति जगदम्बा ने कई वर्षों पूर्व अपने एक भक्त को दर्शन देकर अपना स्थान बताया तथा अपने दर्शनों से उस भक्त के जीवन का भी उद्धार किया. और आज हम आपको दर्शन करवाने जा रहे हैं प्रेम शक्ति स्वरूप माता के उसी पवित्र स्थल चोटिला “चामुंडा माता मंदिर “ के।
मंदिर के बारे में:
भक्तों, ""चामुंडा माता मंदिर"" गुजरात के सुरेंद्र नगर ज़िले में राजकोट के पास चोटिला नामक एक छोटे से कस्बे में लगभग 1250 फीट ऊँची चोटिला पर्वत की चोटी पर स्थित है. उंचाई पर स्थित होने के कारण मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 700 सीढियाँ चढ़कर जाना पड़ता है, यहाँ आने वाले भक्त चामुंडा माता की कृपा के साथ साथ चारों ओर फैले प्राक्रतिक सौन्दर्य का भी सुखद अनुभव प्राप्त करते हैं.
चामुंडा माता का प्राकट्य एवं मंदिर का इतिहास:
भक्तों, चामुंडा माता के प्राकट्य के विषय में पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार कहा जाता है कि एक बार चण्ड और मुंड नामक दैत्य ने देवताओं, ऋषि मुनियों, मनुष्यों को बहुत कष्ट दे रहे थे, इस कष्ट से अपने भक्तों को मुक्ति दिलाने के लिए माँ काली ने उन दैत्यों से एक लम्बे समय तक युद्ध करके उनके सिर धड़ से अलग करके उनका संघार किया. और सिर माँ अम्बिका को भेंट कर दिए माँ अम्बिका ने प्रसन्न होकर माँ काली को वरदान दिया की वो चामुंडा के नाम पूजी जायेंगी. और इस प्रकार माँ काली, चामुंडा माता नाम से विख्यात हुयी. भक्तो, गुजरात के सुरेन्द्र नगर चोटिला स्थित चामुंडा माता मंदिर के इतिहास की बात करें तो कहा जाता है. कई वर्षों पहले माता के एक भक्त को एक बार स्वपन में माँ चामुंडा ने दर्शन दिए. और एक विशेष स्थान पर अपना प्राचीन विग्रह दबा होने के विषय में बताकर उसको वापस स्थापित करने का निर्देश दिया. कहा जाता है की उस भक्त ने माँ के द्वारा निर्देशित स्थान की खुदाई की और वहीं उसे चामुंडा माँ का वर्तमान मंदिर में स्थापित स्वयंभू विग्रह मिला, फिर विग्रह को स्थापित करके मंदिर का निर्माण कराया गया। भक्तो माँ चामुंडा के इस विग्रह की पूजा करने वालो की कामनाएं माँ चामुंडा अवश्य पूरा करतीं हैं , इसलिए दूर-दूर से श्रद्धालु माँ की पूजा के लिए यहाँ आते हैं।
मंदिर में मुख्य पूजा:
भक्तों, जैसा कि मंदिर के नाम से ही पता चलता है कि मंदिर की मुख्य देवी चामुंडा माता हैं, गर्भग्रह में विराजित चामुंडा माता का विग्रह अति प्राचीन, दिव्य एवं स्वयंभू है. इसमें माँ की शक्ति विशेष रूप से प्रकट है। माँ के सामने भक्तों द्वारा जो भी अर्जी लगाई जाती है उसे माँ सुनती है और श्रधालुओं की आस्था के अनुसार उसे पूरा भी करती है। भक्तगण अपने साथ लाई भोग एवं पूजा सामग्री माता को अर्पित कर उनकी दयादृष्टि की कामना करते हैं.
मंदिर में अन्य देव मूर्तियां:
भक्तो मंदिर के गर्भ गृह में माता चामुंडा के विग्रह के अतिरिक्त, मंदिर परिसर में ही भैरव बाबा की भी मूर्ति है, माता के मंदिर के पास ही नीचे उतरकर गुप्तेश्वर महादेव के दर्शन होते हैं, मंदिर में आने वाले सभी भक्त गुप्तेश्वर महादेव की पूजा अवश्य करते हैं , मंदिर के परिसर में एक गोल लोहे की ग्रिल है जिस पर भक्त जन चुनरी और धागे बांधते हैं, यहाँ पर चुनरी अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए बाँधी जाती है, जिन भक्तो की मनोकामना पूर्ण होती है वो चुनरी खोलकर माँ को प्रसाद चढ़ाते हैं, परिसर में माता की सवारी सिंह की भी भव्य प्रतिमा है. एक ओर यग्य वेदी भी है. जिसमें भक्तजन अगरबत्तियां अर्पित करते हैं तथा समीप के स्थान पर माता को नारियल भेंट करते हैं. मंदिर का परिसर बहुत विशाल है, मंदिर में चढ़ाई के बाद ही बहुत विशाल प्रागंण देखने को मिलता है , माता के दर्शनों के बाद यहाँ पर बैठकर भक्त जन प्रसाद ग्रहण करके कुछ देर विश्राम करते हैं. भक्तो जिन श्रद्धालुओं को यहाँ पर सामूहिक पूजा या संकीर्तन करना हो उसके लिए भी यहाँ पर्याप्त सुन्दर स्थान है, मंदिर परिसर से आस-पास देखने पर दृश्य मन को मोहित करने वाला है और नीचे कस्बे का दृश्य भी बड़ा ही सुन्दर दिखता है।
मनोकामना पूर्ति और विशेष चमत्कार:
भक्तो “चामुंडा माता” के दरबार में श्रद्धालुओं की नित्य ही भीड़ लगी रहती है, लोग अपनी अर्जी लगाने बहुत दूर-दूर से माँ के दरबार में आते हैं, अनेक भक्तों को उनके मन अनुसार सरकारी नौकरी मिली है तो कई भक्तो के कारोबार में विशेष वृद्धि माँ की कृपा से हुयी है, जिन श्रद्धालुओं की मनोकामना माँ के दरबार में आकर पूर्ण हुयी है, उनका मानना है की ये सब माँ की कृपा और चामुंडा माता” पर अटूट विश्वास के फलस्वरूप ही घटित हुआ है। भक्तो, आज भी बहुत से चमत्कार माँ के मंदिर में नित्य ही होते रहते हैं। माँ के मंदिर में पहुँचने से पहले बहुत लम्बी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है, भक्तगण तमाम कष्टों को मुस्कुराकर सहते हुए माँ के जयकारे एवं जोश के साथ मंदिर में आते हैं. और अपने दरबार में श्रद्धा के साथ आने वाले इन भक्तों की कामना माँ शीघ्र ही पूरी करती है।
Disclaimer: यहाँ मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहाँ यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
श्रेय:
लेखक: याचना अवस्थी
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