हनुमान गायत्री मंत्र| Hanuman Gayatri Mantra ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि| GeetGarm Bhakti
Автор: Spiritual GeetGram - Bhakti
Загружено: 2026-01-12
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ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥
यह मंत्र श्री हनुमान जी का गायत्री मंत्र है, जो बुद्धि, शक्ति और आत्मबल की प्राप्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इस मंत्र के माध्यम से साधक वायुपुत्र, अंजनीनंदन श्री हनुमान का ध्यान कर उनसे जीवन में सही दिशा, साहस और विवेक प्रदान करने की प्रार्थना करता है।
मंत्र का भावार्थ (सरल शब्दों में):
ॐ — ब्रह्म और परम चेतना का प्रतीक, जो साधक को ईश्वर से जोड़ता है।
आञ्जनेयाय विद्महे — हम अंजनी माता के पुत्र श्री हनुमान को जानने और समझने का प्रयास करते हैं।
वायुपुत्राय धीमहि — हम वायु देव के पुत्र हनुमान जी का ध्यान करते हैं, जो अपार शक्ति और वेग के स्वामी हैं।
तन्नो हनुमान् प्रचोदयात् — हे हनुमान जी, हमारी बुद्धि को प्रेरित करें और हमें सही मार्ग दिखाएँ।
इस मंत्र का नियमित जप मन को स्थिर करता है, भय और नकारात्मकता को दूर करता है तथा साधक में आत्मविश्वास, साहस और भक्ति का संचार करता है। यह मंत्र विशेष रूप से छात्रों, साधकों और जीवन में संघर्ष कर रहे लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। 🙏🚩
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