सबकुछ त्याग जंगल में ‘तप’ करने जाना... क्यों रोका बाबा नित्यानंद ने-
Автор: Adbhut gyan Gatha
Загружено: 2023-11-19
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#chidakashgita के इस श्लोक में आंतरिक बदलाव पर जोर है, श्लोक का पहला हिस्सा उन लोगों के लिए है जो सोचते हैं कि जीवन की हर समस्या का समाधान यह है कि सबकुछ छोड़छाड़कर जंगल में भाग जाया जाए। उनके लिए जंगल में बस जाना, किसी गुफा में रहने लगना बहुत रूमानी लगता है। लेकिन यह पलायन से अधिक और कुछ नहीं है। अगर जंगल में रहने से ही मन पवित्र, शांत और स्थिर हो जाता तो सभी जंगली पशु तो संतों की अवस्था को प्राप्त हो जाते। लेकिन जिस तरह से जंगली पशु अपनी नैसर्गिक पाशविक प्रवृत्ति के अधीन हैं उसी तरह से संसार से भागकर जंगल में रहने वाला संसारी मनुष्य भी अपने साथ उन सभी मानवीय दुर्बलताओं को अपने साथ जंगल में ले जाता है जिनके साथ वह संसार में रह रहा था। उसके मन के विकार भी जस के तस ही रहते हैं बस स्थान बदल जाता है।
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