साथ साथ, न० : 3, श्रृंखला, श्री प्रेम रावत द्वारा - स्वांस रुपी मंथन
Автор: Prem Rawat Official
Загружено: 2020-09-07
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"जो मेरा जीवन है जिस जीवन को लेकर के मैं जिन्दा हूँ, यह जो मंथन हो रहा है क्या निकल रहा है — विष ? मेरे अंदर से क्या निकल रहा है — शांति, आनंद, अमृत या गुस्सा ?" —प्रेम रावत
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(Saath Saath, No: 3, Shrinkhla, Shri Prem Rawat Dwara - Swaans Roopi Manthan)
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