Kanha Man Ke Meet | Krishna Bhajan | कान्हा मन के मीत | कृष्णा भजन बहुत ही मीठा
Автор: Ishtdev
Загружено: 2025-12-21
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गोविंदा ओ कान्हा,
मेरे मन के मीत।
राधा-रस में रंगे हुए,
तुमसे लागी प्रीत॥
यमुना तट पर बंसी बाजे,
मोहे मधुर संगीत।
जग भूलूँ मैं ओ मनमोहन,
तुममें रहूँ निहित॥
गोविंदा ओ कान्हा,
मेरे मन के मीत।
राधा-रस में रंगे हुए,
तुमसे लागी प्रीत॥
माखन-सी मुस्कान तुम्हारी,
मन में उतरे गीत।
नैनों-नैनों में बात रची है,
यही प्रेम की रीत॥
गोविंदा ओ कान्हा,
मेरे मन के मीत।
राधा-रस में रंगे हुए,
तुमसे लागी प्रीत॥
दरस न हो जो ओ मेरे मोहन,
याद बने संगीत।
मेरे मन पे कान्हा तुम्हारे,
भोलेपन की जीत॥
गोविंदा ओ कान्हा,
मेरे मन के मीत।
राधा-रस में रंगे हुए,
तुमसे लागी प्रीत॥
Lyrics - PDPawla
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