यह पाठ माँ दुर्गा ने स्वयं भगवान शिव, राम और कृष्ण को दिया था।
Автор: श्री "सद्गुरु" जी
Загружено: 2026-01-15
Просмотров: 533
भगवान विष्णु और मध ु कैटभ युद्ध की कथा।
सतगुरु जी के श्री मुख से
ॐ नमो नारायण,
आप से प्रार्थना है कि आप नीचे दिए गए नंबर पर कॉल करके अपना नाम परिहार पाठ और चंडीपाठ के लिए अवश्य लिखवा ले ,
01145797307
01145502387
01149945995
सभी संगत उत्कीलन , निष्कीलन , परिहार और शापोद्वार की कृपा ग्रहण करने के लिए दिए गए लिंक पर जाकर फार्म अवश्य भरें।
अधिक जानकारी के लिए धाम के हेल्पलाइन नंबर पर या अपने नजदीकी धाम केंद्र पर संपर्क करें।
ओर विशेष कृपा सभी को लेना है कोई भी ना रहे
ध्यान की विधि (परा प्रकृति का अनुभव)
सद्गुरु जी ने वीडियो के अंत में [01:13:33]
पर एक विशेष ध्यान कराया है। इसके मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
भगवान श्री लक्ष्मी नारायण धाम
बैठने का तरीका: किसी भी आरामदायक स्थिति में बैठें। शरीर, हाथ और उंगलियों को बिल्कुल ढीला छोड़ दें। आँखें बंद रखें।
जीभ की स्थिति: अपनी जीभ को ऊपर तालू (Palate) से सटाकर रखें।
मंत्र का मानसिक जाप: मन में केवल एक बार "श्रीं ऐं" (Shring Aing) का उच्चारण करें और फिर शांत हो जाएं।
तत्वों का विसर्जन (कल्पना): मन में यह विचार लाएं कि आप इन आठ तत्वों से अलग हैं:
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश (पंचतत्व)।
मन, बुद्धि और अहंकार।
अनुभव: इस अवस्था में खुद को बिल्कुल "अकेला" और "शांत" महसूस करें। सद्गुरु जी के अनुसार, यही आपकी वास्तविक (परा) प्रकृति है, जो दुखों से मुक्त है।
2. मंत्रों के व्यावहारिक प्रयोग
वीडियो में कुछ विशिष्ट समस्याओं के लिए मंत्रों के सरल उपाय बताए गए हैं:
क्रोध शांत करने के लिए: अगर घर में पति-पत्नी के बीच झगड़ा हो या कोई बहुत गुस्से में हो, तो उसे समझाने के बजाय मन ही मन 9 बार यह मंत्र बोलें:
"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे"
सद्गुरु जी का कहना है कि इससे नकारात्मक शक्ति तुरंत शांत हो जाती है।
[01:05:36]
बच्चों की पढ़ाई और एकाग्रता के लिए: केवल "ऐं" (Aing) शब्द का उच्चारण बहुत प्रभावशाली बताया गया है। इससे मानसिक तनाव और डिप्रेशन में भी लाभ मिलता है। [01:08:12]
बीमारियों के लिए: दिन में 3 से 4 बार शांत होकर बैठने और मंत्र का जाप करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलने की बात कही गई है।
3. "तीन संध्या पाठ" के नियम
सद्गुरु जी ने इस पाठ को करने के लिए कुछ सावधानियां भी बताई हैं:
राहु काल का त्याग: यह पाठ सुबह, दोपहर और शाम को कभी भी किया जा सकता है, बस उस समय राहु काल नहीं होना चाहिए। (राहु काल का समय आप इंटरनेट या पंचांग से देख सकते हैं)। [00:02:45]
पूर्ण समर्पण: पाठ करते समय माँ भगवती को अपना सब कुछ समर्पित कर देने का भाव रखें, तभी इसका पूर्ण फल मिलता है।
नोट: सद्गुरु जी ने वीडियो में यह भी स्पष्ट किया है कि यह पाठ और मंत्र किसी विशेष धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण के लिए हैं।
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: