श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् | Mata Annapurna
Автор: Divya Stotra | दिव्य स्त्रोत
Загружено: 2026-01-03
Просмотров: 111
यहाँ श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् के सभी 12 श्लोकों का संस्कृत पाठ और उनका सरल हिंदी अर्थ दिया गया है। यह स्तोत्र न केवल भोजन के लिए, बल्कि ज्ञान और मुक्ति के लिए भी माँ से प्रार्थना है।
श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् (सम्पूर्ण)
1. नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी। प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥
अर्थ: हे माँ! आप नित्य आनंद देने वाली, वरदान और अभय देने वाली और सौंदर्य की खान हैं। आप सभी पापों को दूर करने वाली साक्षात् महेश्वरी हैं। हिमालय के वंश को पावन करने वाली काशी की स्वामिनी, मुझे कृपा की भिक्षा प्रदान करें।
2. नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी मुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी। काश्मीरागरुवासिता रुचिकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥
अर्थ: आप अनेक प्रकार के रत्नों और स्वर्ण वस्त्रों से सुशोभित हैं। आपके गले में मोतियों का हार शोभायमान है। आप केसर और अगरु की सुगंध से महक रही हैं। हे काशी की देवी, मुझे भिक्षा प्रदान करें।
3. योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मार्थनिष्ठाकरी चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी। सर्वैश्वर्यसमस्तवाञ्छितकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥
अर्थ: आप योग का आनंद देने वाली, शत्रुओं का नाश करने वाली और धर्म-अर्थ में निष्ठा जगाने वाली हैं। सूर्य, चंद्रमा और अग्नि के समान चमकने वाली और तीनों लोकों की रक्षा करने वाली हे माँ, मुझे भिक्षा दें।
4. कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमा शङ्करी कौमारी निगमार्थगोचरकरी ओङ्कारबीजाक्षरी। मोक्षद्वारकवाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥
अर्थ: कैलाश की गुफाओं में वास करने वाली माँ गौरी, उमा, शंकरी और कौमारी! आप वेदों के अर्थ को प्रकट करने वाली और 'ॐ' अक्षर स्वरूपा हैं। मोक्ष के द्वार खोलने वाली हे माँ, मुझे भिक्षा दें।
5. दृश्यादृश्यविभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी लीलानाटकसूत्रखेलनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी। श्रीविश्वेशमनःप्रमोदनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥
अर्थ: आप दृश्य और अदृश्य शक्तियों को धारण करने वाली हैं, पूरा ब्रह्मांड आपके उदर में समाया है। आप इस संसार रूपी नाटक की सूत्रधार हैं और ज्ञान का दीपक जलाने वाली हैं। भगवान विश्वनाथ के मन को प्रसन्न करने वाली हे माँ, मुझे भिक्षा दें।
6. आदिक्षान्तसमस्तवर्णनकरी शम्भोस्त्रिभावाकरी काश्मीरा त्रिजनेश्वरी त्रिलहरी नित्याङ्कुरा शर्वरी। कामाकाङ्क्षकरी जनोदयकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥
अर्थ: आप 'अ' से 'क्ष' तक के समस्त वर्णों (शब्दों) की जननी हैं। आप तीनों लोकों की स्वामिनी और भक्तों की इच्छाएं पूरी करने वाली हैं।
7. देवी सर्वविचित्ररत्नरुचिरा दाक्षायणी सुन्दरी वामं स्वादुपयोधरा प्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरी। भक्ताभीष्टकरी सदाशुभकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥
अर्थ: आप दिव्य रत्नों से सुशोभित दक्ष-पुत्री (सती) और अत्यंत सुन्दरी हैं। आप भक्तों की कामनाएं पूरी करने वाली और सदैव शुभ करने वाली हैं।
8. चन्द्रार्कानलकोटिकोटिसदृशा चन्द्रांशुबिम्बाधरी चन्द्रार्काग्निसमानकुण्डलधरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरी। मालापुस्तकापाशाङ्कुशधरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥
अर्थ: आपकी आभा करोड़ों सूर्य और चंद्रमाओं के समान है। आपने हाथों में माला, पुस्तक, पाश और अंकुश धारण किया है।
9. क्षत्रत्राणकरी महाभयकरी माता कृपासागरी साक्षान्मोक्षकरी सदा शिवकरी विश्वेश्वरश्रीधरी। दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥
अर्थ: आप संकटों से रक्षा करने वाली और कृपा का सागर हैं। आप साक्षात् मोक्ष देने वाली और आरोग्य (स्वस्थ) प्रदान करने वाली हैं।
10. अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे ज्ञानवैराग्यसिद्धयर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥
अर्थ: हे अन्नपूर्णा! आप सदैव पूर्ण हैं और भगवान शंकर की प्राणप्रिया हैं। हे माता पार्वती! मुझे ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि के लिए भिक्षा प्रदान करें।
11. माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् ॥
अर्थ: माता पार्वती मेरी माता हैं, महादेव मेरे पिता हैं, शिवभक्त मेरे बंधु (भाई-बहन) हैं और तीनों लोक ही मेरा स्वदेश (घर) है।
12. सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
अर्थ: हे कल्याणमयी माँ गौरी! आप सभी मंगलों में मंगल हैं, पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं। मैं आपकी शरण में आता हूँ, आपको नमस्कार है।
पाठ का लाभ:
प्रतिदिन इसका पाठ करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।
मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
यह स्तोत्र अहंकार मिटाकर कृतज्ञता का भाव जगाता है।
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: