कर्ण ने अपनी मुक्ति के लिए कुंती से कहा तिलांजलि देने को | महाभारत एक धर्म युद्ध
Автор: Tilak
Загружено: 2023-11-05
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भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन दो भगवान!
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श्री कृष्ण वीरगति को प्राप्त होने वाले पांडवों की मुक्ति के लिए तिलांजलि देने के लिए सूची बनाते हैं। श्री कृष्ण कुंती से पूछते हैं की किसी पांडव के परिवार में से किसी का नाम रह गया हो तो हमें बता दीजिए। कुंती कर्ण का नाम बताने में हिचकती है लेकिन जब श्री कृष्ण कुंती से पूछते हैं तो वह वहाँ से चली जाती है। कुंती नदी के किनारे पर जाकर खड़ी हो जाती है और कर्ण के बारे में सोचती है। कर्ण की आत्मा कुंती से आकर कहती है की मेरी आत्मा की मुक्ति करे उसे इस तरह भटकने के लिए ना छोड़े और कृपा करके मुझे तिलांजलि दे दें। कुंती अपनी विवश्ता को कर्ण को बताते हुए मना कर देती है की वह ऐसा नहीं कर सकती। कर्म कुंती को अपनी मुक्ति के लिए बार बार कहते हुए वहाँ से अदृश्य हो जाता है। कुंती श्री कृष्ण से मिलने के लिए आती है और बताती हैं की मेरा कर्ण तड़प रहा है वह मुझसे मुक्ति के लिए कह रहा है। श्री कृष्ण कुंती को समझाते हैं की आपको इस सत्य से पर्दा हटाना ही होगा और आपको कर्ण का मुक्ति देनी ही होगी अन्यथा उसके साथ फिर से अन्याय हो जाएगा यदि उसे मुक्ति नहीं मिली तो। श्री कृष्ण कुंती को कहते हैं की कल तिलांजलि देते हुए सभी को कर्ण की सच्चाई के बारे में बता दीजिए।
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