Summary Episode of Ram Van Gaman Karnataka 14 | राम वनगमन यात्रा कर्नाटक | रामयात्रा
Автор: Your Travel Journey
Загружено: 2026-01-17
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यहाँ कर्नाटक में स्थित राम वनगमन (Ram Van Gaman) के प्रमुख स्थल सरल और स्पष्ट रूप में दिए जा रहे हैं। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने वनवास काल में दक्षिण की ओर जाते हुए कर्नाटक के कई स्थानों को स्पर्श किया था। इन स्थानों की धार्मिक परंपराओं में आज भी यह स्मृतियाँ जीवित हैं।
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⭐ कर्नाटक में राम वनगमन पथ के प्रमुख स्थान
1. हम्पी – किष्किंधा नगरी (किश्किंधा राज्य)
यह कर्नाटक का सबसे मुख्य राम वनगमन स्थल है।
महत्व:
बाली-सुग्रीव का राज्य किष्किंधा यहीं था।
राम और लक्ष्मण की सुग्रीव से पहली मुलाकात यहीं हुई।
बाली वध भी यहीं माना जाता है।
सीता की खोज का आरंभ भी इसी क्षेत्र से हुआ।
महत्वपूर्ण स्थान:
ऋष्यमूक पर्वत
मतंग पर्वत
अंजनाद्रि हिल (हनुमान जन्मभूमि)
किष्किंधा गुहा
पंपासर/पंपा सरोवर
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2. पंपा सरोवर (हम्पी)
यह मातंग ऋषि का आश्रम क्षेत्र था।
यहाँ राम-लक्ष्मण ने सीता की खोज के लिए मार्गदर्शन लिया।
यह सरोवर कर्नाटक के पाँच पवित्र सरोवरों में से एक है।
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3. अंजनाद्रि पर्वत – हनुमान जन्मस्थान
स्थानीय और वैदिक परंपराओं के अनुसार हनुमानजी का जन्म इसी पर्वत पर हुआ।
यहाँ विशाल हनुमान मंदिर है।
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4. सुग्रीव गुफा (किश्किंधा)
यह वह स्थान माना जाता है जहाँ सुग्रीव ने वैली से छिपकर निवास किया था।
राम और लक्ष्मण का सुग्रीव से मिलन भी यहीं हुआ।
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5. देवी यमुनाचल / हनुमानहल्ली (बेल्लारी)
इस क्षेत्र में भी कई गुहाएँ और पहाड़ियाँ हैं जो राम-हनुमान कथा से जुड़ी परंपराएँ बताती हैं।
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6. कुवेम्पू क्षेत्र (शिवमोगा – जोग फॉल्स के पास)
कुछ स्थानीय मान्यताओं में बताया गया है कि श्रीराम ने दक्षिण की ओर जाते समय पश्चिमी घाट के घने जंगलों में भी चरण रखे।
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7. बेल्लारी – तुंगभद्रा तट
माना जाता है कि सीता की खोज के दौरान राम और लक्ष्मण यहाँ से गुजरे।
कई जगह "राम लक्का", "लक्ष्मण वेणी" जैसे स्थानीय नाम मिलते हैं।
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✨ संक्षेप में: कर्नाटक का राम वनगमन मार्ग
बेल्लारी → हंपे/किष्किंधा → पंपा सरोवर → ऋष्यमूक पर्वत → अंजनाद्रि पर्वत → तुंगभद्रा तट → दक्षिण की ओर (आंध्र/तमिलनाडु मार्ग)
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