pared ramleela kanpur 2024!! pared ki ramlila! ramleela pared kanpur
Автор: Aao chale with kashyap parivar
Загружено: 2024-10-06
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महाराज प्रयाग नारायण तिवारी ने कराई थी परेड रामलीला की शुरुआत, जानिए- क्या है 145 वर्षों का रोचक इतिहास
कानपुर, शहर में तीन दर्जन से ज्यादा स्थानों पर रामलीला का मंचन किया जाता है लेकिन परेड रामलीला का अपना अलग ही महत्व है। यह रामलीला अपने आप में 145 वर्षों का इतिहास समेटे है। आजादी से पूर्व शुरू हुई इस रामलीला में वक्त के साथ भव्यता बढ़ती चली गई। लाइट, साउंड, भव्य सजावट और मंत्रमुग्ध कर देने वाला मंचन हर किसी को यहां आने पर मजबूर कर देता है।मंचन की शुरूआत के साथ ही दिनों दिन यहां भीड़ बढ़ती जाती है।मथुरा का चतुर्वेदी परिवार यहां दस दिनों तक रामलीला का मंचन करता है। परेड रामलीला जहां रामचरित मानस की भव्यता का भान कराती है वहीं सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश देती है।
1877 में शुरु हुई थी रामलीला : परेड मैदान में रामलीला की शुरुआत 145 वर्ष पूर्व हुई थी। वर्ष 1877 में महाराज प्रयाग नारायण तिवारी, लाला शिव प्रसाद खत्री और रायबहादुर लाला विशंभरनाथ अग्रवाल ने रामलीला का मंचन शुरू करने के लिए अंग्रेजों से अनुमति मांगी थी।काफी सोच विचार के बाद अंग्रेजों ने रामलीला मंचन की अनुमति दे दी। रामलीला की शुरूआत हुई तो अंग्रेजों को भी आमंत्रित किया गया। अंग्रेजों को रामलीला का मंचन इतना अच्छा लगा कि उन्होंने परेड मैदान पर अग्रिम वर्षों के लिए रामलीला मंचन की अनुमति प्रदान कर दी। यहां अंग्रेज सैनिक परेड करते थे इसलिए इस मैदान का नाम परेड पड़ गया।श्री रामलीला सोसाइटी के प्रधानमंत्री कमल किशोर अग्रवाल बताते हैं कि उसी दौरान रायबहादुर लाला विशंभरनाथ अग्रवाल, बाबू विक्रमाजीत सिंह व अन्य सहयोगियों ने परेड रामलीला सोसाइटी गठित की। धीरे-धीरे परेड में होने वाली रामलीला ने विशिष्ट पहचान बना ली। पांच वर्ष तक कमेटी के अध्यक्ष रहने के बाद महाराज प्रयाग नारायण तिवारी ने कमेटी को सार्वजनिक रूप प्रदान किया और पदमुक्त हो गए। उनके द्वारा दिए गए रामलीला के विभिन्न मुखौटे, चांदी का सिंहासन और हनुमान का मुकुट आज भी परेड रामलीला सोसाइटी में हैं। इन्हें प्रत्येक वर्ष रामलीला के समय निकाला जाता है।महाराज प्रयाग नारायन शिवाला के प्रबंधक अभिनव तिवारी ने बताया कि आज भी उनके परिवार का एक सदस्य मुकुट पूजन करता है जिसके बाद रामलीला मंचन की शुरूआत होती है
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