अकबर–बीरबल और रास्ते में गिरे सिक्के I एक सिक्का, कई राज़, सिक्के बोले I Best of Akbar Birbal
Автор: मनोरंजक कहानियाँ
Загружено: 2025-12-19
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/ @मनोरंजककहानियाँ-म7श
यह कहानी अकबर–बीरबल के समय की है, जब आगरा में एक दिन सम्राट अकबर को महल के पास के एक कम इस्तेमाल होने वाले रास्ते पर कुछ सोने के सिक्के पड़े मिले। पहली नज़र में यह एक साधारण घटना लगती है, लेकिन अकबर को इसमें कुछ असामान्य लगता है। वे इस विषय पर बीरबल से चर्चा करते हैं और बीरबल को इसकी सच्चाई पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं।
बीरबल धीरे-धीरे इस रहस्य की तह तक जाने लगते हैं। वे देखते हैं कि सिक्के केवल एक दिन नहीं, बल्कि लगातार उसी रास्ते और उससे जुड़े इलाकों में मिल रहे हैं। कभी मंदिर के पास, कभी बाज़ार में, कभी पुराने मकान के पास। लोग सिक्कों को देखकर डरने लगते हैं और कुछ लोग उन्हें छूने से भी बचते हैं। इससे साफ़ हो जाता है कि यह केवल लालच का मामला नहीं, बल्कि किसी पुराने डर और दबे हुए सच से जुड़ा हुआ है।
जांच के दौरान बीरबल को पता चलता है कि महल के नीचे एक पुराना और भुला दिया गया रास्ता है, जिसका इस्तेमाल वर्षों पहले शाही खजाने से धन ले जाने के लिए किया गया था। कई साल पहले कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने मिलकर खजाने से धीरे-धीरे धन निकाला था और उसका हिसाब कुछ कागज़ों में लिखा गया था। उन अधिकारियों में से एक का मन डर के कारण बदल गया था, लेकिन बाकी लोगों ने उसे चुप करा दिया और उसकी मृत्यु को सामान्य घटना बताकर मामला दबा दिया गया।
वर्षों बाद उस अधिकारी का बेटा इस सच्चाई को उजागर करना चाहता है, लेकिन उसके पास न ताक़त है, न खुलकर बोलने का साहस। इसलिए वह संकेतों का सहारा लेता है। वह जानबूझकर उसी पुराने रास्ते पर शाही सिक्के गिराने लगता है, ताकि कोई समझदार व्यक्ति इस पर ध्यान दे। उसका उद्देश्य किसी को फँसाना नहीं, बल्कि सच्चाई को धीरे-धीरे सामने लाना होता है।
बीरबल इन संकेतों को समझ लेते हैं। वे पुराने नक्शों, लोगों की बातें और घटनाओं को जोड़कर पूरा सच अकबर के सामने रखते हैं। अंत में बीरबल की योजना से वही दोषी अधिकारी खुद ही कागज़ निकालने के लिए पुराने रास्ते में आते हैं और पकड़े जाते हैं।
दरबार में सारे सबूत सामने रखे जाते हैं। दोषियों को सज़ा मिलती है, उनका धन जब्त कर जनता के हित में लगाया जाता है और उस निर्दोष अधिकारी का नाम साफ़ किया जाता है, जिसकी वजह से यह सारा रहस्य शुरू हुआ था।
कहानी इस सीख के साथ समाप्त होती है कि सच चाहे जितना दबा दिया जाए, एक न एक दिन वह सामने आ ही जाता है, और कभी-कभी एक छोटा सा सिक्का भी बड़े से बड़े राज़ को उजागर कर सकता है।
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