| महाराज वीर विक्रमादित्य कथा | स्वर - तोगाराम आर्य |
Автор: Rajasthani Bhakti Sangeet
Загружено: 2021-05-10
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#महाराजा_वीर_विक्रमादित्य #उज्जैन के राजा थे, जो अपने #ज्ञान, #वीरता और #उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे । #सम्राट_विक्रमादित्य गर्दभिल्ल वंश के शासक थे इनके पिता का नाम राजा गर्दभिल्ल था। सम्राट विक्रमादित्य ने शको को पराजित किया था।
उनके पराक्रम को देखकर ही उन्हें महान सम्राट कहा गया और उनके नाम की उपाधि कुल 14 भारतीय राजाओं को दी गई ।
#"विक्रमादित्य" की उपाधि भारतीय इतिहास में बाद के कई अन्य राजाओं ने प्राप्त की थी, जिनमें गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय और सम्राट हेमचन्द्र विक्रमादित्य (जो हेमु के नाम से प्रसिद्ध थे) उल्लेखनीय हैं।
राजा विक्रमादित्य नाम, 'विक्रम' और 'आदित्य' के समास से बना है जिसका अर्थ 'पराक्रम का सूर्य' या 'सूर्य के समान पराक्रमी' है।उन्हें विक्रम या विक्रमार्क (विक्रम + अर्क) भी कहा जाता है (संस्कृत में अर्क का अर्थ सूर्य है)।
महाराजा वीर विक्रमादित्य की सम्पूर्ण कथा #देशी_वीणा_भजन_सम्राट श्री_तोगाराम_आर्य की मधुर वाणी में प्रस्तुत है, आप भी सुनें और आनंद लें।
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