शून्य का स्वामी , घट-घट में अविनाशी है । शिव भजन। दिव्य गीता स्वर
Автор: Divya Gita Swar
Загружено: 2026-01-06
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जब जीवन में सब कुछ सूना लगे, और कोई राह न दिखे, तो उस 'शून्य के स्वामी' की शरण में आ जाना... शांति अपने आप मिल जाएगी।
हर हर महादेव! 🙏 स्वागत है आपका हमारे चैनल पर। आज का यह भजन "शून्य का स्वामी, राख का भूषण" भगवान शिव के उस परम स्वरूप को समर्पित है जो आदि भी हैं और अंत भी।
यह भजन नहीं, महादेव के प्रति एक गहरा समर्पण है। जब हम अहंकार की राख को शरीर पर मलते हैं, तभी हम उस अविनाशी तत्व को अपने भीतर (घट-घट में) महसूस कर पाते हैं।
इस भजन को क्यों सुनें? अगर आप तनाव, चिंता या जीवन की भागदौड़ से थक चुके हैं, तो यह धुन आपको कैलाश जैसी शीतलता और शांति देगी। इसे आँखें बंद करके सुनें और शिव तत्व को महसूस करें।
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