अखण्ड ज्योत से टपकता केसर || श्री आई माताजी मंदिर बिलाड़ा धाम || सीरवी समाज की कुलदेवी
Автор: Bhagyashri Music And Films
Загружено: 2026-01-05
Просмотров: 101
बिलाड़ा (जोधपुर, राजस्थान) स्थित आई माता का इतिहास श्रद्धा और चमत्कारों से भरा है ,
आई माता का जन्म 15वीं शताब्दी (विक्रम संवत 1472) में गुजरात के अंबापुर में हुआ था। उनके बचपन का नाम जीजी बाई था उन्हें मां अंबे का अवतार माना जाता है।
आई माता ने 'आई पंथ' की स्थापना की, जो छुआछूत और भेदभाव के विरुद्ध था। उन्होंने 11 नियमों (डोरा पंथ) का पालन करने का संदेश दिया। वे प्रसिद्ध लोक देवता बाबा रामदेवजी की शिष्या मानी जाती हैं
बिलाड़ा स्थित उनके मंदिर को 'बढेर' कहा जाता है यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मंदिर में पिछले 600 से अधिक वर्षों से एक अखंड ज्योति जल रही है। मान्यता है कि इस दीपक की लौ से काजल की जगह केसर टपकता है, जिसका
उपयोग भक्त अपनी आंखों और रोगों के उपचार के लिए करते हैं
आई माता के मंदिर में कोई मूर्ति नहीं होती, बल्कि वहां उनकी गादी (तख्त) और अखंड ज्योति की पूजा की जाती है। सीरवी समाज के लोग उन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं
#ytshort #villagelife #youtubeshorts #nature #village #shortmusic #villagevlog #song
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: