Maa Jayanti - Dhwaj | Keertan on Shivratri Eve | Ft. Bhawana Chand Rajwar | Part-2
Автор: Umbrella Studios by Kapsona Kapri
Загружено: 2025-03-10
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शिवरात्रि 2025 की पूर्व संध्या पर माँ जयन्ती मंदिर में बिताई गई रात दिव्य आनंद से भरपूर थी। जैसे ही ठंडी रात की हवा ने एक पवित्र ऊर्जा को अपने साथ बहाया, मंदिर परिसर दीपों की सुनहरी झिलमिलाहट और चंद्रमा की सौम्य रोशनी से प्रकाशित हो उठा। शंखों और मंदिर की घंटियों की गूंज ने इस अविस्मरणीय आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत को चिह्नित किया।
पूरी रात, मंदिर का वातावरण भक्तिमय भजनों की मधुर ध्वनियों से गूंजता रहा, जिन्हें श्रद्धालु पुरुषों और महिलाओं ने गाया। माँ जयन्ती और देवी माँ की स्तुति में गाए जा रहे ये भजन मंदिर परिसर में प्रतिध्वनित हो रहे थे, जिनकी दिव्य लय ने भक्तों और परमात्मा के बीच अटूट संबंध बना दिया। हर स्वर में भक्ति थी, हर ताल में आध्यात्मिक ऊर्जा, और हर आवाज़ एक ऐसे सुरीले संगम में बदल गई जिसने हर हृदय को भक्तिरस में डुबो दिया।
पुरुषों की गहरी और गूंजती हुई आवाज़ों ने शक्ति और गंभीरता का अनुभव कराया, जबकि महिलाओं की मधुर और कोमल आवाज़ों ने वातावरण में दिव्यता की लय बिखेर दी। इन भक्तिमय गीतों की समवेत ध्वनि मंदिर की दीवारों से टकराकर भक्तों को एक अद्भुत भक्ति भाव में डुबो रही थी। झांझ, मृदंग और तबले की ताल ने संगीत को एक जीवंत गति दी, जबकि हारमोनियम की सुरमय धुनों ने भजनों को और भी मधुर बना दिया।
जैसे-जैसे रात गहराती गई, भजनों की गूंज और भी गहरी होती गई। भक्तगण भक्ति में लीन होकर झूम रहे थे, उनकी आँखें बंद थीं, और वे माँ के नाम के आनंद में डूब चुके थे। कुछ श्रद्धालु भक्ति की मस्ती में नृत्य कर रहे थे, जबकि कुछ ध्यान की मुद्रा में बैठे थे, संगीत की लहरों में डूबकर। "जयन्ती माता की जय" और "हर हर महादेव" के पावन जयघोष से पूरा मंदिर गूंज उठा, जिससे एक दिव्य ऊर्जा प्रवाहित हो रही थी।
जैसे-जैसे शिवरात्रि की भोर समीप आई, संगीत अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया—जोश से भरा हुआ, फिर भी आत्मा को शांति प्रदान करने वाला। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं माँ जयन्ती भक्तों की प्रार्थनाओं को सुन रही हों। जब भजन धीरे-धीरे शांत होने लगे और भोर की पहली किरण मंदिर के शिखर को छूने लगी, तब भी वातावरण में भक्ति, संतोष और दिव्यता की अनोखी भावना व्याप्त थी।
माँ जयन्ती मंदिर में वह रात केवल एक उत्सव नहीं थी, बल्कि यह एक आध्यात्मिक यात्रा थी—एक ऐसा अनुभव जहाँ संगीत ने मानव और दिव्यता के बीच एक सेतु का कार्य किया।
The night before Shivratri 2025 at Maa Jayanti Temple, Dhwaj was nothing short of divine magic. As the cool night air carried a sense of sacred energy, the temple premises glowed under the golden flicker of diyas and the soft radiance of the moon. The rhythmic echoes of conch shells and temple bells marked the beginning of an unforgettable spiritual journey.
Throughout the night, the atmosphere was filled with the soul-stirring melodies of bhajans sung by devoted men and women. The bhajans, praising Maa Jayanti and the divine mother, resonated through the temple complex, their divine rhythm creating an unbreakable connection between the devotees and the Almighty. Each note carried devotion, each beat ignited spiritual fervor, and every voice blended into a mesmerizing harmony that could melt even the toughest of hearts.
The men’s voices, deep and sonorous, brought a sense of power and intensity, while the women’s voices, sweet and soothing, wove a thread of celestial grace into the night. The chorus of these devotional hymns reverberated through the temple walls, wrapping everyone in a sacred trance. The sound of cymbals, mridangas, and tablas added a rhythmic heartbeat to the melodies, while harmoniums provided a rich backdrop that made the bhajans even more immersive.
As the night deepened, the bhajans took on a more profound aura, with devotees swaying in devotion, their eyes closed, lost in the bliss of the goddess’s name. Some danced in divine ecstasy, while others sat in meditation, letting the music wash over them like waves of pure devotion. The sacred mantras, “Jayanti Mata ki Jai” and “Har Har Mahadev,” were chanted repeatedly, filling the temple with an electrifying spiritual vibration.
As the early hours of Shivratri approached, the music reached its peak—energetic, yet deeply soothing. The connection between the devotees and the divine felt tangible, as if Maa Jayanti herself was listening to the heartfelt prayers. The first rays of dawn finally touched the temple dome, and as the bhajans slowly faded into silence, the air remained thick with a sense of fulfillment, peace, and divine grace.
That night at Maa Jayanti Temple was not just a celebration; it was an experience—a journey into the heart of devotion, where music became the bridge between the mortal and the divine.
Chapters: -
00:01 Evening Aarti
00:18 Khol de Mata Khol Bhawani Dharam Kevad
03:26 Pawan uda ke le gayi rey mere Maa ki chunariya
04:41 Ese Shri Bhagwan ko barambar pranaam hai
06:53 Krishna Krishna mein pukarun
08:51 Aaj hum teri seva mein aayan
10:30 Vo man kahan se laun
11:27 Dhaar mein Maiya ko ghar ro ro ro ro
14:52 Satsang by Daal Guru
16:44 Guru charan kamal balihari re
18:30 Saanwli surat mein mera dil deewana ho gaya
21:06 Mero man lagi gyo raam jyu ke bhajan mein
21:35 SaReGaMa by Bhawana Chand Rajwar @bhawanadancer55
22:00 Ending timelapse of the beautiful morning
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