Devchandraji Chovisi | Jain Stavan | 1. Rishabh Jin Stavan | Rushabh Jinand Shu Pritadi |
Автор: Ratnatrayam
Загружено: 2022-02-14
Просмотров: 10896
Jainism Music is created to spread the unfamous literature of Jainism to the modern world.
00:00 - संगीत
( रचयिता : देवचंद्रजी महाराज)
00:33 - गाथा 1
ऋषभ जिणंदशुं प्रीतडी, किम कीजे हो कहो चतुर विचार;
प्रभुजी जई अलगा वस्या, तिहां किणे नवि हो को वचन उच्चार. ऋषभ० १
02:08 - गाथा 2
कागळ पण पहोंचे नहीं, नवि पहोंचे हो तिहाँ को परधान;
जे पहोंचे ते तुम समो, नवि भाखे हो कोनुं व्यवधान. ऋषभ० २
03:25 - गाथा 3
प्रीति करे ते रागीआ, जिनवरजी हो तुमे तो वीतराग;
प्रीतडी जेह अरागीथी, भेळववी हो ते लोकोत्तर मार्ग. ऋषभ० ३
05:05 - गाथा 5
प्रीति अनादिनी विष भरी, ते रीते हो करवा मुज भाव;
करवी निर्विष प्रीतडी, किण भांते हो कहो बने बनाव. ऋषभ० ४
06:23 - गाथा 4
प्रीति अनंती पर थकी, जे तोडे हो ते जोडे एह;
परमपुरुषथी रागता, एकत्वता हो दाखी गुण-गेह. ऋषभ० ५
08:02 - गाथा 6
प्रभुजीने अवलंबतां, निज प्रभुता हो प्रगटे गुणराश;
देवचंद्रनी सेवना, आपे मुज हो अविचळ सुखवास. ऋषभ० ६
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: