Cattle run over by Train 16311 SGNR KCVL SF Express between SuratGarh Lalgarh,Cause and precaution
Автор: Rakesh Sharma Bikaner
Загружено: 2025-08-02
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Cattle run over by Train 16311 SGNR KCVL SF Express between Suratgarh Lalgarh Cause and precaution
इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव (Electric Locomotive) से कैटल (पशु) रन ओवर होने पर कई प्रकार की क्षति और दुर्घटनाएं हो सकती हैं। यह न केवल पशु के लिए जानलेवा होता है, बल्कि लोकोमोटिव, ट्रैक, और रेलवे संचालन पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।
संभावित नुकसान (Damages due to Cattle Run Over):
1.लोकोमोटिव क्षति (Locomotive Damage):
सामने के हिस्से (Pilot / Cow Catcher) का टूटना या मुड़ जाना।
अंडर फ्रेम में फंसे मलबे से ब्रेकिंग सिस्टम, ट्रैक्शन मोटर या केबल को नुकसान।
ओएचई (Overhead Equipment) या पैंटोग्राफ में झटका लगने से डिस्टर्बेंस।
2. ट्रैक को नुकसान:
अचानक ब्रेक लगाने से रेल पटरी पर थ्रस्ट और स्ट्रेस उत्पन्न होता है।
कुछ मामलों में रेल की फिश प्लेट या क्लिप खुल सकती है।
3. सेफ्टी और टाइम टेबल में बाधा:
इंजन स्टाल हो सकता है या इंजन को हटाकर दूसरा इंजन लगाना पड़ सकता है।
विलंब, रूट ब्लॉक और ट्रेनों के बीच अंतराल बढ़ सकता है।
4. क्रू और पैसेंजर्स को खतरा:
अगर कैटल इंजन में फंस जाए तो डिरेलमेंट (पटरियों से उतरना) तक हो सकता है।
ब्रेकिंग के समय अचानक झटका लगने से क्रू या यात्री घायल हो सकते हैं।
कैटल रन ओवर के कारण (Causes):
1. ट्रैक पर खुले मवेशी:
ग्रामीण इलाकों में ट्रैक के पास जानवरों का घूमना आम बात है।
चरवाहों की लापरवाही।
2. ट्रैक फेंसिंग का अभाव:
रेलवे ट्रैक के किनारे फेंसिंग न होने से जानवर आसानी से ट्रैक पर आ जाते हैं।
3. अचानक ट्रैक क्रॉस करना:
ट्रेन की आवाज सुनकर घबरा कर जानवर दौड़ते हैं और पटरियों पर आ जाते हैं।
4. लो विजिबिलिटी और नाइट रनिंग:
रात के समय या कोहरे में लोको पायलट को जानवर समय पर दिखाई नहीं देता।
निवारण (Prevention & Solutions):
1. तकनीकी उपाय:
• लोकोमोटिव में पशु डिटेक्शन सिस्टम (Animal Detection Sensor) लगाना।
• फ्रंट कैमरा और नाइट विजन डिवाइस।
• लाउड हॉर्न सिस्टम ट्रैक पर जानवरों को चेताने के लिए।
2. इन्फ्रास्ट्रक्चर उपाय:
ट्रैक किनारे फेंसिंग (बाड़ लगाना), खासकर हाई-डेंसिटी रूट्स पर।
अंडरपास या ओवरपास ग्रामीण इलाकों में जानवरों के लिए।
3. सामुदायिक जागरूकता:
ग्रामीणों को पशुओं को ट्रैक पर न ले जाने के लिए जागरूक करना।
ग्राम स्तर पर रेलवे सुरक्षा जागरूकता अभियान।
4. रेलवे और प्रशासनिक समन्वय:
स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर पशु नियंत्रण योजना बनाना।
दुर्घटना संभावित स्थानों पर गेटमैन या गार्ड की तैनाती।
प्रभाव के बाद की कार्रवाई (Post-incident Protocol):
लोकोमोटिव का निरीक्षण (Visual & Technical).
ट्रैक और ओएचई की जांच।
रनिंग क्रू से रिपोर्ट लेना।
यदि आवश्यक हो तो RPF और GRP द्वारा रिपोर्ट दर्ज करना।
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