Village _patoda_laxmangarh_sikar_history🔥
Автор: Omprakash bhamu
Загружено: 2025-10-30
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1_पाटोदा गांव के जवाहर सिंह और डूंगर सिंह चाचा-भतीजा थे, जो १८५७ की क्रांति के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़े थे। उन्होंने शेखावाटी ब्रिगेड में रिसालदार के रूप में काम किया और डूंगरजी की गिरफ्तारी के बाद आगरा किले पर हमला करके उन्हें छुड़ाया। बाद में उन्होंने नसीराबाद छावनी पर हमला कर अंग्रेजों का खजाना लूटा।
2_डूंगरजी-जवाहरजी का इतिहास
आरंभिक जीवन: डूंगर सिंह और जवाहर सिंह दोनों पाटोदा गांव के थे और शेखावाटी ब्रिगेड के सदस्य थे। इस ब्रिगेड का उद्देश्य शेखावाटी में ब्रिटिश शासन के खिलाफ पनप रहे विद्रोह को कुचलना था।
3_आजादी की लड़ाई: जब डूंगरजी को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर आगरा किले में कैद कर दिया, तो जवाहर सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर उन पर हमला किया और उन्हें छुड़ा लिया।
नसीराबाद छावनी पर हमला: इसके बाद, दोनों ने मिलकर नसीराबाद छावनी पर हमला किया और अंग्रेजों का खजाना लूट लिया।
4_बाद का जीवन: जवाहर सिंह को बाद में बीकानेर के महाराजा रतन सिंह ने शरण दी।
5_लोठू सिंह निठरवाल
शहीद लोठू सिंह: लोठू सिंह निठरवाल भी एक जाट योद्धा थे जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़े थे। हालांकि उनका संबंध सीधे तौर पर डूंगरजी और जवाहरजी से नहीं है, फिर भी वे उन समय के एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी थे, जो लोगों को जागीरदारों के शोषण से मुक्त कराना चाहते थे।
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