नया नौहा 2025 औलाद का ग़म दिल पे उठाना नहीं आसा अंजुमन अब्बासिया सुरौली सुल्तानपुर
Автор: Abbasiya Azadari surauli Sultanpur
Загружено: 2025-08-12
Просмотров: 182
नौहा– अंजुमन अब्बासिया सुरौली सुल्तानपुर
कलाम–मौलाना हसन मेंहदी मीरपुरी साहब
औलाद का ग़म दिल पे उठाना नहीं आसां
मय्यत पे जवां लाल की जाना नहीं आसां
आगोश के पालों पा जब आती है जवानी
मां बाप के अरमान भी पाते हैं रवानी
दौलत ये किसी तौर गवाना नहीं आसां
बेटे की जुदाई में शबो रोज़ तड़पना
याक़ूब से पूछे कोई यूसुफ का बिछड़ना
इस दर्द को सीने में छुपाना नहीं आसां
18 बरस के अली अकबर की जुदाई
शब्बीर से हमशकले पैगंबर की जुदाई
कर जाए फरामोश ज़माना नहीं आसां
शह कहते थे रो रो के ख़ुदा हाफ़िज़ो नासिर
रुखसत किया मैंने तुम्हें अय तय्यबो ताहिर
मालूम है अब लौट के आना नहीं आसां
दो-चार क़दम चल के पुकारे मेरे दिलबर
मुड़ मुड़ के मुझे देखते रहना अली अकबर
साबिर हूं मगर दिल को मनाना नहीं आसां
रुख़ करके मदीने का पुकारे शहे वाला
मरने के लिए जाता है अब गेसूवों वाला
सुग़रा तुझे यसरब से बुलाना नहीं आसां
कहता था फलक़ ख़ालिके अकबर की दुहाई
क्या ख़ाक में मिल जाएगी लैला की कमाई
खोई हुई बिनाई को पाना नहीं आसां
मां ख़ैमें में सेहत की दुआ मांग रही है
और बाप से बेटे को क़ज़ा मांग रही है
मंज़र से निगाहों को हटाना नहीं आसां
महशर है बपा हाय क़यामत की घड़ी है
मक़तल में पिसर मां दरे ख़ैमा पा खड़ी है
इस दर्द की तस्वीर बनाना नहीं आसां
मक़तल से सदा आई सलामत रहें बाबा
मैदान में आने की ना ज़हमत करें बाबा
क़िस्मत में जो लिखा है मिठाना नहीं आसां
हाथों से कमर थामे हुए कहते थे सरवर
बिनाई मेरी खो गयी अय वाए मुक़ाद्दर अब अश्क़ भी आँखों से बहाना नहीं आसां
ख़ैमे से हसन ज़ैनबे दिलगीर पुकारी
क़ुर्बान है शब्बीर बहन तुम पे तुम्हारी
यूँ वादए तिफली को निभाना नहीं आसां
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: