हर मकर संक्राति पर बढ़ता और सावन में एक तिल घटता रहस्यमय शिवलिंग | शिवरात्रि विशेष | 4K |दर्शन 🙏
Автор: Tilak
Загружено: 2022-10-21
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भक्तों नमस्कार! प्रणाम! सादर नमन और अभिनन्दन! भक्तों शिव जी के प्रसिद्ध तीर्थों में काशी (वाराणसी) का महत्वपूर्ण स्थान है। काशी में विश्वनाथ जी के अलावा कई और भी पौराणिक महत्व वाले शिव मंदिर हैं। कई मंदिरों का इतिहास सैकड़ों साल तो कइयों का हजारों साल पुराना है। ऐसा ही एक प्राचीन मंदिर है तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर!
मंदिर के बारे में:
भक्तों श्री तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर वाराणसी के सबसे पुराने और सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर का सनातन धर्म अवलंबियों में बड़ा महत्व और अगाध श्रद्धा है। इस मंदिर के संबंध में मान्यता है कि हर साल मकर संक्रांति पर यहां स्थित शिवलिंग तिल-तिल करके बढ़ता है। इस कारण इस मंदिर को तिलभांडेश्वर कहा जाता है।
मंदिर का इतिहास:
भक्तों तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण 18 वीं शताब्दी में हुआ था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग लगभग 2,500 वर्ष पहले प्रकट हुआ स्वयंभू शिवलिंग है। जो हर वर्ष एक तिल ( तिल यानी तिल के बीज ) के बराबर बढ़ जाता है। जिसका उल्लेख शिवपुराण में भी है। वर्तमान में यह शिवलिंग 3।5 फीट ऊंचा है और आधार का व्यास लगभग 3 फीट है।
पौराणिक कथा:
भक्तों तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर के बारे में एक पौराणिक कथा है जिसके अनुसार- वर्षों पहले इसी स्थान पर विभाण्ड ऋषि ने शिव को प्रसन्न करने के लिए तप किया था। भगवान शिव ऋषि विभाण्ड की तपस्या से प्रसन्न हुये और शिवलिंग के रूप में उन्हें दर्शन दिया तथा विभाण्ड ऋषि से कहा कि “कलियुग में ये शिवलिंग प्रतिवर्ष तिल के समान बढ़ेगा और इसके दर्शन मात्र से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा”। श्रावण मास में आज भी हजारों शिवभक्त यहाँ विशेष पूजा अर्चना करते हैं।
लोककथा:
भक्तों तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर को लेकर प्रचलित एक लोककथा के अनुसार - पुराने समय में इस क्षेत्र में तिल की खेती होती थी। उस समय किसानों को इस क्षेत्र में ये शिवलिंग दिखाई दिया था। लोगों ने शिवलिंग की पूजा करनी शुरू कर दी। यहां के लोग शिवलिंग पर तिल चढ़ाते थे। इस वजह से इसे तिलभांडेश्वर कहा जाने लगा।
होती है कालसर्प दोष की शांति:
भक्तों वाराणसी के तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर में दूर दूर से भक्त लोग जन्म कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष और ग्रहों की शांति के लिए भी पूजा व अनुष्ठान करते हैं। ऐसा करने से जन्म कुंडली के दोष दूर हो जाते हैं। मंदिर में कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
त्योहार व उत्सव:
भक्तों तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि, श्रीराम नवमी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, विजयदशमी और अन्नकूट जैसे कई त्योहार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं श्रावण मास व महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्तों की भयंकर भीड़ उमड़ती है। इस दिन शिव जी का विशेष पूजन व अभिषेक किया जाता है। महाशिवरात्रि के अलावा सोमवार और प्रदोष व्रत पर भी यहाँ हजारों दर्शनार्थी आते हैं। स्थानीय भक्तों और आयोजकों द्वारा हर साल महाशिवरात्रि पर्व के समय पंद्रहदिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है।
मकर संक्राति पर बढ़ता है और सावन में एक तिल घटता है:
भक्तों तिलभांडेश्वर महादेव का स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है लेकिन इसके मंदिर का निर्माण 18वीं सदी में हुआ था। सतयुग ये लेकर द्वापर युग तक यह लिंग हर रोज एक तिल के बराबर बढ़ता रहा। लेकिन कलयुग के आगाज़ के साथ लोगों को यह चिंता सताने लगी कि यदि भगवान शिव ऐसे ही हर रोज बढ़ते रहे तो एक दिन पूरी दुनिया इस लिंग में समाहित हो जाएगी। तब भक्तों ने श्रावण में शिव जी की विशेष आराधना करते हुये अपनी चिंता व्यक्त की। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर श्रावण सोमवार के दिन भक्तों को दर्शन दिए और यह वरदान दिया कि मैं हर वर्ष मकर संक्रांति में एक तिल बढ़कर भक्तों का कल्याण करूँगा। तथा श्रावण में एक तिल घटकर अपने भक्तों को चिंता विमुक्त करूंगा। इसीलिए श्रावण के सोमवार पर इस दिव्य धाम शिव जी के दर्शन पूजन का विशेष महात्म है। यहाँ दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
अंग्रेजों द्वारा शिवलिंग का परीक्षण:
भक्तों तिलभांडेश्वर महादेव से जुड़ी एक अन्य कथा के अनुसार- एक बार अंग्रेजों ने शिवलिंग के बढ़ने की सत्यता जांचने की कोशिश की थी। अंग्रेजों ने शिवलिंग के चारों ओर धागा मजबूती से बांध दिया था जो कि कुछ समय बाद टूट गया था।
मंदिर परिसर:
भक्तों तिलभांडेश्वर महादेव के मंदिर परिसर में, श्री गणेश जी, श्री सीताराम जी, माता सरस्वती जी, श्री राधाकृष्ण जी, माता दुर्गा जी, भैरव जी, कार्तिकेय जी, आदि शंकराचार्य जी की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित हैं। इन मूर्तियों के अलावा इस मंदिर में प्राचीन समय के कई शिवलिंग विराजमान हैं।
भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! 🙏
इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन। 🙏
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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