भारत ने AOAD से F-15EX फाइटर जेट पर नाटो लाइन ब्रेक की! अमेरिका एयरफोर्स बोली असम्भव ।
Автор: HIND News Dot
Загружено: 2025-12-31
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भारत ने AOAD से F-15EX फाइटर जेट पर नाटो लाइन ब्रेक की! अमेरिका एयरफोर्स बोली असम्भव ।
अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक टैंक Council on Foreign Relations (CFR) की रिपोर्ट ने वॉशिंगटन की रणनीतिक सोच को झकझोर दिया है। इस रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि अमेरिका को अब तक लगता था कि वह भारतीय सेना की आवश्यकताओं, क्षमताओं और तैयारियों को पूरी तरह समझता है, लेकिन हालिया आकलन ने साबित कर दिया कि भारत की वास्तविक सैन्य शक्ति और उसका ऑपरेशनल नेटवर्क अमेरिका की पूर्व धारणाओं से कहीं आगे निकल चुका है।
अब तक अमेरिकी रणनीति का केंद्र NATO-सेंट्रिक C4ISR सिस्टम रहा है, जिसे वह अपनी सबसे बड़ी ताकत मानता है। इसी सोच के तहत अमेरिका ने भारत को F-15EX Eagle-II जैसे शक्तिशाली फाइटर जेट की पेशकश की और यह दावा किया कि इसके साथ भारत को अमेरिकी C4ISR नेटवर्क का पूरा लाभ मिलेगा। अमेरिका को विश्वास था कि इतनी बड़ी तकनीकी पेशकश भारत को उसकी ओर आकर्षित कर लेगी।
लेकिन भारत ने उस रास्ते को नहीं चुना। भारत ने न तो NATO नेटवर्क में प्रवेश किया और न ही अमेरिकी कंट्रोल वाले मिसाइल इकोसिस्टम का हिस्सा बना। इसके बजाय भारत ने एक कहीं अधिक जटिल और रणनीतिक कदम उठाया—स्वदेशी Network Fusion Architecture का निर्माण। इस सिस्टम के तहत भारत ने अपने सभी फाइटर जेट (रूसी, फ्रांसीसी और स्वदेशी), एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (AWACS), ग्राउंड रडार और सैन्य सैटेलाइट्स को एक साझा नेटवर्क में जोड़ दिया।
यह भारतीय एयर ऑफेंस और एयर डिफेंस सिस्टम अब तय करता है कि दुश्मन के लक्ष्य को फाइटर जेट से नष्ट करना है या जमीन से मिसाइल लॉन्च करनी है। यह केवल प्लेटफॉर्म आधारित ताकत नहीं, बल्कि नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के अलावा NATO में कोई भी देश ऐसा पूर्ण नेटवर्क लागू नहीं कर पाया है—यहां तक कि फ्रांस भी नहीं।
भारत की यह उपलब्धि इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने यह सब अमेरिकी नेटवर्क पर निर्भर हुए बिना हासिल किया। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज की आधुनिक लड़ाई केवल सबसे ताकतवर फाइटर जेट खरीदने की नहीं, बल्कि अपने हाथ में कंट्रोल रखने वाले स्वतंत्र नेटवर्क तैयार करने की है। CFR की रिपोर्ट इसी निष्कर्ष पर पहुंचती है कि भारत की यह क्षमता अमेरिका के लिए भी एक रणनीतिक सरप्राइज बन चुकी है।
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