हुआ सवेरा अब उठ जाओ | मंगल प्रभाती - बाल गीत | ब्र. रवीन्द्रजी आत्मन् | Hua Savera Ab Uth Jaao |
Автор: Baal Br. Pt. Sumat Prakash Ji
Загружено: 2025-05-27
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हुआ सबेरा अब उठ जाओ,
पंच प्रभु का ध्यान लगाओ ॥ टेक ॥।
तत्त्वों का चिन्तन भी करना,
भेदज्ञान हृदय में धरना ।
लक्ष्य सु जीवन का दोहराओ ।। हुआ. ।। 1 ।।
निज दोषों की निंदा करना,
दृढ़ संकल्प पूर्वक तजना ।
निर्मल निज परिणाम बनाओ ।। हुआ. ।। 2 ।।
कर्मबन्ध भावों से होता,
अरे आलसी जीवन खोता ।
मोहादिक दुर्भाव नशाओ ।। हुआ. ।। 3 ।।
अन्य न कोई सुख-दुख दाता,
व्यर्थ मूढ़ भव में भरमाता ।
निज में ही उपयोग लगाओ ।। हुआ. ।। 4 ।।
पर से कुछ भी नहीं सम्बन्ध,
शुद्धातम है सदा अबन्ध ।
आतम अनुभव अब प्रगटाओ ।। हुआ. ।। 5 ।।
रखना मन में नहीं कामना,
भाना नित वैराग्य भावना ।
शुद्धातम में ही रम जाओ ।। हुआ. ।। 6 ।।
आतम ही परमातम समझो,
व्यर्थ विकल्पों में मत उलझो ।
खुद ही परमातम बन जाओ ।। हुआ. ।। 7 ।।
स्रोत :" प्रेरणा "
पाठ क्रमांक: ०२
रचयिता: बाल ब्र. श्री रवीन्द्र जी 'आत्मन्’
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Lyrics - Baal Br. Shree Ravindra Ji ‘Aatman’
Singer – Vandana Parakh, Rajnandgaon
Chorus – Anamika Bardiya
Studio - Vilas Digital Recording Studio, Rajnandgaon
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