कैसे करें दीपावली की सामान्य पूजा | Shailendra Pandey | Astro Tak
Автор: Astro Tak
Загружено: 2022-10-21
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ज्योतिर्विद शैलेंद्र पांडेय जी से जानिए कैसे करें दीपावली का सामान्य पूजा #ShailendraPandey #Dhanteras #DekhBinaBreak #AstroTak
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हर साल की तरह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानि आज दिवाली का त्योहार देश भर में धूम धाम से मनाया जा रहा है. दिवाली पर लोग घर या दुकानों की साफ-सफाई करते हैं. मान्यता है कि मां लक्ष्मी को साफ-सफाई प्रिय है और मां लक्ष्मी का वास साफ-सफाई वाली जगहों पर ही होता है. दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का विशेष विधान है. इस दिन संध्या और रात्रि के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, विघ्नहर्ता भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा और आराधना की जाती है. पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात में महालक्ष्मी स्वयं भूलोक पर आती हैं और हर घर में विचरण करती हैं. इस दौरान जो घर हर प्रकार से स्वच्छ और प्रकाशवान हो, वहां वे अंश रूप में ठहर जाती हैं इसलिए दिवाली पर साफ-सफाई करके विधि विधान से पूजन करने से माता महालक्ष्मी की विशेष कृपा होती है. लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ कुबेर पूजा भी की जाती है.
दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन से पहले घर की साफ-सफाई करें और पूरे घर में वातावरण की शुद्धि और पवित्रता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें. साथ ही घर के द्वार पर रंगोली और दीयों की एक शृंखला बनाएं. पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और लाल कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति रखें या दीवार पर लक्ष्मी जी का चित्र लगाएं. चौकी के पास जल से भरा एक कलश रखें. माता लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति पर तिलक लगाएं और दीपक जलाकर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, हल्दी, अबीर-गुलाल आदि अर्पित करें और माता महा लक्ष्मी की स्तुति करें. इसके साथ देवी सरस्वती, मां काली, भगवान विष्णु और कुबेर देव की भी विधि विधान से पूजा करें. महालक्ष्मी पूजन पूरे परिवार को एकत्रित होकर करना चाहिए. महालक्ष्मी पूजन के बाद तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरण की पूजा करें. पूजन के बाद श्रद्धा अनुसार ज़रुरतमंद लोगों को मिठाई और दक्षिणा दें. दिवाली पर करें इन नियमों का पालनकार्तिक अमावस्या यानि दीपावली के दिन प्रात:काल शरीर पर तेल की मालिश के बाद स्नान करना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से धन की हानि नहीं होती है. दिवाली के दिन वृद्धजन और बच्चों को छोड़कर अन्य व्यक्तियों को भोजन नहीं करना चाहिए. शाम को महालक्ष्मी पूजन के बाद ही भोजन ग्रहण करें. दीपावली पर पूर्वजों का पूजन करें और धूप व भोग अर्पित करें. प्रदोष काल के समय हाथ में उल्का धारण कर पितरों को मार्ग दिखाएं. यहां उल्का से तात्पर्य है कि दीपक जलाकर या अन्य माध्यम से अग्नि की रोशनी में पितरों को मार्ग दिखाएं. ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. दिवाली से पहले मध्य रात्रि को स्त्री-पुरुषों को गीत, भजन और घर में उत्सव मनाना चाहिए. कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में व्याप्त दरिद्रता दूर होती है. दीपावली में पांच दिन स्त्री प्रंसग न करें ऐसा करने से घर में दरिद्रता का वास होता है.
ऐसे में ज्योतिर्विद शैलेंद्र पांडेय जी से जानते हैं कि पूजा सामग्री और पूजन की संपूर्ण विधि... #DekhBinaBreak #shailendrapandey #AstroTak
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