स्याम! मने चाकर राखो जी || Meera Bhai Bhajan 2026
Автор: Epic Stories
Загружено: 2026-01-13
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स्याम! मने चाकर राखो जी,
गिरधारिलाल! चाकर राखो जी॥
चाकर रह सूँ बाग लगा सूँ, नित उठ दरसण पासूँ।
बिंद्राबन की कुंजगलिन में, तेरी लीला गासूँ॥
चाकरी में दरसण पाऊँ, सुमिरन पाऊँ खरची।
भाव भगति जागीरी पाऊँ, तीनूँ बाताँ सरसी॥
मोर मुगट पीतांबर सोहे, गल बैजंती माला।
बिंद्राबन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला॥
हरे हरे नित बाग लगाऊँ, बिच बिच राखूँ क्यारी।
साँवरिया के दरसण पाऊँ, पहर कुसुम्मी सारी॥
जोगी आया जोग करण कूँ, तप करणे संन्यासी।
हरि भजन कूँ साधु आयो, बिंद्राबन के बासी॥
मीरा के प्रभु गहिर गंभीरा, सदा रहो जी धीरा।
आधी रात प्रभु दरसन दीन्हें, प्रेम नदी के तीरा॥
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