इष्ट की भक्ति में स्थिर रहना है तो संग भी वैसा ही रखिए | Maharaj Ji Pravachan
Автор: Aacharya Raj Ji Maharaj
Загружено: 2026-01-15
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महाराज जी बताते हैं कि
भक्ति केवल जप से नहीं, संग से भी बनती है।
जिस इष्ट को हम मानते हैं,
उसी इष्ट को मानने वालों का संग आवश्यक है।
👉 क्योंकि जो व्यक्ति दूसरे इष्ट को मानता है,
वह अनजाने में या जानबूझकर
हमारे इष्ट में दोष निकालने लगता है।
जब हम बार-बार अपने इष्ट के विरुद्ध बातें सुनते हैं,
तो हमारा मन धीरे-धीरे भ्रमित होने लगता है,
श्रद्धा डगमगाने लगती है
और भक्ति की स्थिरता टूट जाती है।
🙏 शास्त्र कहते हैं —
श्रद्धा की रक्षा संग से होती है।
इस वीडियो में आप जानेंगे:
🔹 इष्ट भक्ति में संग का महत्व
🔹 क्यों हर सत्संग आपके लिए नहीं होता
🔹 भक्ति में भ्रम कैसे पैदा होता है
🔹 इष्ट निष्ठा को स्थिर कैसे रखें
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इष्ट की भक्ति में स्थिर रहना है तो संग भी वैसा ही रखिए | Maharaj Ji Pravachan
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