श्री सम्मेद शिखर जी की पावन धरा पर हुआ आचार्य श्री के परम प्रभावक शिष्य/ शिष्या का भव्य मंगल प्रवेश
Автор: श्रमण संस्कृति(SS)
Загружено: 2025-12-31
Просмотров: 2761
🎇मंगल प्रवेश 🎇
🛕💫 शाश्वत तीर्थक्षेत्र श्री सम्मेद शिखर जी की पावन धरा पर हुआ 💫🛕
🍁भव्य मंगल प्रवेश*🍁
संत शिरोमणि ,आचार्य भगवंत श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य और शिष्या
विद्या शिरोमणि ,आचार्य भगवंत श्री 108 समयसागरजी महाराज के परम अज्ञानुवर्ती शिष्य और शिष्या
⚡⚡⚡
🔅 पूज्य मुनि श्री 108 धर्मसागर जी महाराज एवं*
🔅 *पूज्य मुनि श्री 108 भावसागर जी महाराज
और
🍁 आर्यिका रत्न 105 श्री विमलमति माता जी ससंघ (6) 🍁
📅 दिनांक: 31 दिसंबर 2025
🕒 समय: दोपहर 3:00 बजे
📍 स्थान: श्री सम्मेद शिखर जी
श्रावकों के अपार उत्साह, अटूट भक्ति और गगनभेदी जयकारों के बीच गुरुदेवों की मंगल अगवानी की गई। भक्ति के इस सागर में हर भक्त सराबोर नजर आया।
Music: Joyful Christmas
Musician: SergePavkinMusic
URL: https://pixabay.com/music/-joyful-chr...
🙏जय जिनेन्द्र 🙏
📌 Disclaimer (Safe for YouTube Reviewers):
यह वीडियो केवल धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों के लिए बनाया गया है।
इसमें दिखाई देने वाली सभी घटनाएँ Digambar Jain धर्म की पारंपरिक धार्मिक गतिविधियाँ हैं—जैसे स्वागत, शोभायात्रा, अभिषेक और पूजा।
वीडियो में किसी भी प्रकार की हिंसा, घृणा, भेदभाव, राजनीति, हानिकारक संदेश या संवेदनशील/ग्राफ़िक सामग्री शामिल नहीं है।
यह सामग्री किसी भी व्यक्ति, समाज, समुदाय या धर्म के प्रति
नफरत, घृणा, आक्रोश, उकसावे या हानि को बढ़ावा नहीं देती।
वीडियो का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक प्रेरणा, दर्शनों का साझा करना और सांस्कृतिक संरक्षण है।
हम YouTube Community Guidelines—
Hate Speech, Harassment, Extremism, Graphic Content & Harmful Content policies
का पूर्ण रूप से पालन करते हैं।
➡️ This video covers a peaceful and traditional Digambar Jain spiritual event.
There is no harmful, graphic, or sensitive content.
The purpose is religious documentation and cultural preservation only.
#viral #bhakti #motivation #bhajan #sammedshikharji #vidhyasagarjimaharaj #samaysagarjimaharaj #pramansagarji #gunayatan #damoh #news #jaindharma #saints #munipramansagar #siolsinghai
दिगंबर जैन संत (मुनि) मौसम की परवाह किए बिना, वैराग्य और आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त करने के लिए अत्यंत तपस्यापूर्ण जीवन शैली का पालन करते हैं, जिसमें वे वस्त्र सहित सभी वस्तुओं का त्याग कर देते हैं।कड़ाके की ठंड (दिसंबर/जनवरी) के महीनों में, वे अत्यधिक तापमान सहन करते हैं, नंगे पैर चलते हैं और बिना गद्दे, तकिए या कंबल के जमीन पर सोते हैं।
सर्दियों में उनकी जीवनशैली के प्रमुख पहलू:
अनासक्ति का व्रत:वे अपरिग्रह (अनासक्ति) के सिद्धांत का पालन करते हुए कुछ भी धारण नहीं करते, यहाँ तक कि गर्म वस्त्र या जूते भी नहीं।
शारीरिक सहनशक्ति: गहन तपस्य और ध्यान के माध्यम से , वे शारीरिक सुख-सुविधाओं को नजरअंदाज करने की क्षमता विकसित करते हैं, जिससे वे गर्मी और सर्दी के प्रति प्रतिरोधी बन जाते हैं।
आवागमन और आश्रय: वे लगातार घूमते रहते हैं, केवल वर्षा ऋतु (चतुर्मास) के दौरान चार महीने तक ही एक स्थान पर ठहरते हैं। सर्दियों में, वे उपाश्रय (अस्थायी आश्रय) या खुले स्थानों जैसे निर्दिष्ट क्षेत्रों में शरण ले सकते हैं।
दैनिक दिनचर्या: ठंड के बावजूद, वेसूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद दैनिक अनुष्ठान ( अवश्यक) करते हैं, जिसमें साल में दो बार केशलोंच (हाथ से बाल खींचना) भी शामिल है।
विशेष उल्लेख:
शीतकालीन यात्रा: दिसंबर 2025 में, रिपोर्टों में दिगंबर संतों के शिखरजी जैसे स्थानों की ओर प्रस्थान करने का उल्लेख है।
शारीरिक सुरक्षा: हालांकि वे कृत्रिम ताप का उपयोग नहीं करते हैं, कुछ विवरणों से संकेत मिलता है कि अत्यधिक कठिन परिस्थितियों के बावजूद, "दिगंबर पोशाक" (नग्नता) सहनशक्ति की पराकाष्ठा का प्रतिनिधित्व करती है।
यह अभ्यास इस बात पर जोर देता है कि शरीर क्षणभंगुर है और सच्ची मुक्ति (मोक्ष) आत्मा को भौतिक, सांसारिक सीमाओं से अलग करने से ही प्राप्त होती है।
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: