द्वापर युग का गवाह है परसोन मंदिर
Автор: जन विचार
Загружено: 2024-01-08
Просмотров: 3464
द्वापर युग का गवाह है परसोन मंदिर
फरीदाबादउद्योगों के लिए मशहूर इंडस्ट्रियल हब कुछ ऐतिहासिक स्थानों के लिए भी काफी फेमस है।
इनमें मशहूर परसोन मंदिर फरीदाबाद की शान है। यह ऋषि पाराशर की तपोभूमि है। इसका वर्णन अनेक ग्रंथों में भी किया गया है। परसोन मंदिर फरीदाबाद के आकर्षक स्थल बड़खल झील के साथ स्थित है।
इसका नाम इस स्थान को जन्म देने वाले ऋषि पाराशर के नाम पर रखा गया है। परसोन मंदिर के महंत अमरदास बताते हैं कि ऋषि पाराशर ने अपने बल और तप से इस भूमि को शक्तियों से भर दिया था, इसलिए इस क्षेत्र का नाम परसोन पड़ा। उन्होंने बताया कि महर्षि पाराशर के पुत्र महर्षि वेद व्यास ने 18 महापुराणों और महान ग्रंथ महाभारत की रचना की थी।
मान्यता है कि महर्षि वेद व्यास का जन्म इसी स्थल पर हुआ था। ऋषि पाराशर ने अपने तप से इस भूमि को शक्ति प्रदान की। महंत बताते हैं कि इस क्षेत्र का उल्लेख पाराशर ज्योतिष संहिता में मंगला वनी के नाम से किया गया है।
इसी भूमि पर द्वापर युग में अज्ञातवास के दौरान माता कुंती के साथ पांडवों ने भी तप किया था। महंत अमरदास के मुताबिक, यहां पर महर्षि पाराशर का प्राचीन धूना अब भी सुरक्षित रखा है, जिसमें यहां रहने वाले साधु लगातार अग्नि प्रज्ज्वलित रखता है। महंत बताते हैं कि ऋषि पाराशर ने बाण चलाकर अमृत कुंड, हथिया कुंड और ब्रह्मकुंड नामक 3 सरोवर बनाए थे, जिनकी अलग-अलग खूबियां बताई जाती हैं।
मान्यता है कि ब्रह्म कुंड ऋषियों के स्नान का गवाह है। यहां ऋषि पाराशर स्नान करने के बाद नित्य पूजा कर्म आदि करते थे। सूरजकुंड से है रास्तादिल्ली से परसोन जाने के लिए सूरजकुंड रोड होते हुए बड़खल झील पहुंचना होगा। यहां पहुंचने के बाद किसी से भी पूछने पर आसानी से परसोन मंदिर का रास्ता पता चल जाता है
#faridabadnews
#news
#mandir
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: