राक्षसी पूतना का वध एवं उसके पूर्व जन्म की कथा | Shri Krishna Jeevani
Автор: Shree Krishna
Загружено: 2025-12-12
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वसुदेव गोकुल में अपने पुत्र को यशोदा के बगल में लिटा कर व उसकी पुत्री को लेकर वापस मथुरा चले जाते है, लेकिन महामाया के प्रभाव से बेसुध सो रही को कुछ भी नहीं पता चलता है। रोहिणी के जगाने पर यशोदा और नंद राय को पता चलता है कि पुत्र का जन्म हुआ है। गोकुल में उत्सव मनाया जाने लगता है और हर ओर चर्चा होने लगती है उनके तारणहार ने जन्म ले लिया है। वही दूसरी ओर जब कंस को लगने लगता है कि उसके साथ छल किया गया है, आकाशवाणी के अनुसार उसे मारने वाला जन्म ले चुका है, उसका क्रोध सातवें आसमान तक चढ़ जाता है और कारागार के पहरेदारों को हाथियों से कुचलवा देता है। उधर अक्रूर के सुझाव पर वसुदेव को बालिका का रहस्य जानने के लिए महर्षि गर्ग के आश्रम जाते है, तब महर्षि उनके असमंजस को दूर करते हुए कहते है कि उनको पुत्र हुआ था और जो अब उनकी दूसरी पत्नी रोहिणी के पास सुरक्षित है। इधर अपनी मृत्यु से भयभीत कंस के आदेश सैनिक राज्य में पिछले दो माह में पैदा हुए सभी बच्चों को उनकी माताओं से छीन कर मारने लगते है, चारों ओर हाहाकार मच जाता है। बालकों को ढूँढते हुए सैनिक गोकुल पहुँच जाते है, लेकिन गोकुल के नवयुवकों की टोली सैनिकों को पत्थर मार कर खदेड़ देती है। जब इस घटना का पता यशोदा, नंद राय और रोहिणी का पता चलता है तो वे सभी व्यथित हो जाते है। इधर कंस को उसके मंत्री सुझाव देते है कि नंद राय जैसे शक्तिशाली सामंत पर बल प्रयोग नहीं करना चाहिए। वही जब अपने साथियों से मंत्रणा करके नंद राय राजनीतिक परंपरा का निर्वाह करने के लिए कंस के पास भेंट लेकर जाते है, तो कंस भी कूटनीतिक बातें करते हुए वसुदेव का सम्मान करता है। वसुदेव के जाने के पश्चात कंस अपने मंत्रियों के साथ चर्चा करता है कि उसे पूरा विश्वास है कि नंद राय का पुत्र ही देवकी की आठवीं संतान है। कंस बालक कृष्ण की हत्या करने के लिए अकासुर की बहन मायावी राक्षसी पूतना को गोकुल भेजता है। पूतना एक सुन्दर स्त्री का धारण करके नंद राय के घर पहुँचती है और आशीर्वाद देने के बहाने अपने विष लगे स्तन से बालक कृष्ण को दूध पिलाने लगती है। बालक कृष्ण उसके स्तन को काटने लगते है, जिससे पूतना दर्द से तड़प उठती है और अपने वास्तविक रूप में आकर आकाश मार्ग से बालक को लेकर भागने लगती है, लेकिन मार्ग में उसके प्राण निकल जाते है। बालक के जीवित बचने पर सभी गोकुल वासी इसे चमत्कार मानते है और पूतना के विशाल शरीर का दाह संस्कार कर देते है। पूतना की आत्मा का आकाश में बैठे भगवान श्री कृष्ण माता कहते हुए स्वागत करते है और कहते है कि मैंने वामन अवतार के समय ही उसकी मातृ भावना को स्वीकार कर लिया था, तब वह दैत्यों के राजा बलि की पुत्री रत्नमाला थी और उसकी कामना थी कि वह मेरी माँ बने।
सम्पूर्ण जगत में भगवान विष्णु के आठवें अवतार एवं सोलह कलाओं के स्वामी भगवान श्री कृष्ण काजीवन धर्म, भक्ति, प्रेम, और नीति का अद्भुत संगम है। वसुदेव और देवकी के पुत्र के रूप में कारागार में जन्म लेकर गोकुल की गलियों में यशोदा और नंदबाबा के यहाँ पलने वाले, अपनी लीलाओं, जैसे पूतना वध, माखन चोरी, राधा के संग प्रेम, गोपियों के साथ रासलीला और कालिया नाग के दमन के लिए प्रसिद्ध श्री कृष्ण ने युवावस्था में मथुरा कंस का वध करके जनमानस को उसके अत्याचार से मुक्त कराया एवं स्वयं के लिए द्वारका नगरी स्थापना भी की। उनका जीवन केवल लीलाओं तक सीमित नहीं था। उन्होंने समाज को धर्म और कर्म का गूढ़ संदेश देने के लिए महाभारत के युद्ध में पांडवों का मार्गदर्शन किया और अर्जुन के सारथी बनकर उसे "श्रीमद्भगवद्गीता" का उपदेश दिया, जो आज भी जीवन की समस्याओं का समाधान बताने वाला महान ग्रंथ माना जाता है। श्री कृष्ण का जीवन प्रेम, त्याग, और नीति का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। आपका प्रिय चैनल "तिलक" श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ा यह विशेष संस्करण "श्री कृष्ण जीवनी" आपके समक्ष प्रस्तुत है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ी कथाओं का संकलन किया गया है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए।
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