रौनके हैं मगर सकूं नहीं,दिल तवायफों के कोठे जैसा है– हिमांशी बावरा
Автор: Lahari Live
Загружено: 2024-11-30
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रौनके हैं मगर सकूं नहीं,दिल तवायफों के कोठे जैसा है– हिमांशी बावरा
हिमांशी बावरा एक प्रतिभाशाली कवयित्री हैं जिन्होंने अपनी कविताओं में जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया है। उनकी कविताएँ प्रेम, संघर्ष, सामाजिक न्याय और आत्म-खोज जैसे विषयों पर केंद्रित होती हैं।
लहरी लाइव की प्रस्तुति. आप देख रहे हैं गुरु गोरक्षनाथ की तपस्थली से 44 किमी सुदूर दक्षिणांचल के उपनगर उरुवा बाजार में कला सरोकार एवं फ़िराक़ गोरखपुरी द्वारा आयोजित ऐतिहासिक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन. जिसमें देश के राष्ट्रीय कवियों ने अपनी प्रस्तुति से भावुक भी किया और दर्शकों को हंसाया और गुदगुदाया भी.
इस आयोजन को सफल बनाने का श्रेय जाता है प्रवीण श्रीवास्तव, सतेंद्र गुप्ता,संतोष कुमार, संदीप सिंह और अमन सिंह, प्रताप जायसवाल को .
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