नाना रे भाँती नचायौ,भक्तन ने मोकू नाना रे, भांति नचायौ , लोकलाज तजि इनही काज मैंने बैकुंठ बिसरायौ।
Автор: Mahavir Bhagat ji rasik
Загружено: 2023-04-15
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प्रबल प्रेम के पाले पड़कर प्रभु ने नियम बदलते रेखा ।
प्रभु का मान टलेटलजाए, भक्त का मान न टलते देखा ।
जय श्री कृष्णा
जय श्री राधे जय गिरिराज जी की 🙏🙏🙏
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