O Girdhari, O Gopala (Kalyug Bhajan)
Автор: Arch Wordsmith
Загружено: 2026-01-18
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Written by - Dr Archit Srivastava
Composed using Suno AI
Video editing - Filmora Pro
ओ गिरधारी, ओ गोपाला
कैसे युग में, हमको डाला
ओ मधुसूदन, ओ रे कन्हैया
छोड़ गए तुम कैसी ये दुनिया
भक्ति यहां है, भक्त नहीं
पुण्य के लिए वक्त नहीं
ढोंग, आडंबर, पाखण्ड भारी
सच्ची पूजा रास न आ री
सब है झूठ और सब है दिखावा
ओ गिरधारी, ओ गोपाला
ओ गिरधारी, ओ गोपाला
कैसे युग में हमको डाला
ओ मधुसूदन, ओ रे कन्हैया
छोड़ गए तुम कैसी ये दुनिया
जिस यमुना ने चरण को तेरे,
माथे पे अपने रखना चाहा.
उस यमुना की है रंगत काली,
जहर उसमें हमने ही डाला
क्या वृंदावन, और क्या मथुरा
तुमने बनाया, हमने बिगाड़ा
नाम तेरा, ले के ही किया सब
ओ गिरधारी, ओ गोपाला.
शायद तभी तू रूठ गया है,
तेरा भरोसा टूट गया है,
कलयुग के सब दास बने है,
हाथ तुम्हारा छूट गया है.
फिर भी विनती करता हूं तुझसे,
पार लगा दे नाव हमारी,
या ऐसा कर दंड दे हमको,
दे दे कोई विपदा भारी.
अंत करा दे, फेंक सुदर्शन
पाप की हांडी, भरने को आई
या तो सुना दे, मुरली फिर से
डूबती नैया तरने को आई।
रात बहुत लंबी है मोहन
भोर बुला दे, कर दे उजाला
ओ मुरली-धर, कृष्ण कन्हैया
ओ गिरधारी, ओ गोपाला।।
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