उर्वशी के लिए दो देवताओं ने एक साथ निकाला अपना शुक्र - महर्षि वसिष्ठ और राजा निमी की कहानी Story
Автор: Kahaniyon ki Chaupal
Загружено: 2024-02-18
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राजा जनक के पूर्वज महाराज निमी और ब्रह्मा जी के यशस्वी पुत्र ब्रह्मर्षि वसिष्ठ जी ने एक दूसरे के शरीर को शाप देकर गला दिया। ऐसा क्यों हुआ यह भी एक रोचक दृष्टांत है जो इस कहानी में वर्णित है, बहरहाल अपने देह से विलग हुए महर्षि वसिष्ठ अपने पिता ब्रह्मा जी के पास गए और अपने लिए एक नए देह की मांग की। उनकी इस मांग को परम् पिता ब्रह्मा जी ने बड़े ही विचित्र ढंग से पूरा किया, उन्होंने ब्रह्मर्षि वसिष्ठ को वरुण लोक भेज कर वायु रूप से देवताओं के तेज में निवास करने को कहा और फिर उर्वशी को वरुण लोक में भेज दिया। उस समय दो वैदिक देवता 'मित्र और वरुण' उस लोक में सुख पूर्वक निवास कर रहे थे। उर्वशी को देख कर वे दोनों ही काम भाव से ग्रस्त हो गए और फिर घटनाएं ऐसे रोचक मोड़ों से गुजरीं कि दोनों देवताओं ने उर्वशी के निमित्त अपने तेज की प्रतिस्थापना एक ही कुम्भ में कर दिया। इसी कुंभ से ब्रह्मर्षि वसिष्ठ ने अपना पुनर्जन्म पाया और नई देह को प्राप्त हुए और उनके ही साथ इसी कुंभ से महान ऋषि अग्स्त्य जी का भी जन्म हुआ। श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में वर्णित यह कहानी अत्यंक रोचक और ज्ञानवर्धक है। इसे अंत तक अवश्य देखिएगा और अन्य लोगों के साथ शेयर कीजियेगा।
Story of King Nimi and Rishi Vasistha
Kahaniyon Ki Chaupal
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