परमात्मा को पाने की विधि क्या है? | आत्मा से ब्रह्म तक का मार्ग | Aatma Marg
Автор: Aatma Marg
Загружено: 2026-01-17
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परमात्मा को पाने की विधि क्या है? क्या ईश्वर को सच में पाया जा सकता है या केवल अनुभव किया जाता है? वेद, उपनिषद, गीता और सनातन दर्शन इस प्रश्न का उत्तर बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और चेतना के जागरण में बताते हैं।
इस वीडियो में हम विस्तार से जानेंगे कि परमात्मा क्या है, उसे पाने का वास्तविक अर्थ क्या है, ध्यान, ज्ञान, भक्ति और कर्म — इन चारों मार्गों का परमात्मा से क्या संबंध है, और क्यों वेद कहते हैं कि परमात्मा बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही विद्यमान है।
उपनिषदों के अनुसार — “तत्त्वमसि” अर्थात् तू ही वह है। इसका अर्थ यह नहीं कि मनुष्य शरीर ही परमात्मा है, बल्कि यह कि जब अहंकार, अज्ञान और वासनाएँ शांत हो जाती हैं, तब वही चेतना परमात्मा के रूप में प्रकट होती है। गीता बताती है कि निष्काम कर्म, सच्ची भक्ति और आत्मज्ञान — यही परमात्मा को पाने की वास्तविक विधि है।
यह वीडियो उन लोगों के लिए है जो केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि सत्य, ब्रह्म और आत्मा के वास्तविक मार्ग को समझना चाहते हैं। Aatma Marg पर हमारा उद्देश्य किसी मत का प्रचार नहीं, बल्कि वेदों में छिपे सत्य को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
अगर आप सनातन धर्म, वेदिक ज्ञान, आत्मा-परमात्मा और आध्यात्मिक जागरण में रुचि रखते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए है।
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Credits / Reference:
वेद, उपनिषद, श्रीमद्भगवद गीता, सनातन दर्शन, भारतीय आध्यात्मिक ग्रंथ
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