भरत और केवट संवाद (SHREE JANTA RAMLILA SAMITI KAMALA VILAS NAGAR 🚩) अयोध्या कांड का एक प्रसिद्ध
Автор: SJRSKVN RAMLILA
Загружено: 2025-12-19
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केवट का आग्रह: केवट, श्रीराम से कहता है कि वह उन्हें नाव में बिठाने से पहले उनके पैरों को धोना चाहता है, क्योंकि उसके चरण-स्पर्श से पत्थर की शिला भी नारी बन गई थी (अहिल्या का प्रसंग) और वह चाहता है कि उसके हाथों से धोए गए चरण-जल से उसके परिवार और पितरों का उद्धार हो, जैसा कि इस विश्लेषण में बताया गया है।
उतराई से इनकार: गंगा पार कराने के बाद, जब श्रीराम उतराई (पैसे) देना चाहते हैं, तो केवट मना कर देता है। वह कहता है कि यह 'उतराई' तो बहुत छोटी है, वह तो आपके चरणों का स्पर्श चाहता था, जो उसे मिल गया है।
मोक्ष की अभिलाषा: केवट कहता है कि उसे अभी कुछ नहीं चाहिए। जब प्रभु वनवास से लौटें, तब वह उनसे उतराई के रूप में मोक्ष (या कुछ और) मांगेगा, क्योंकि भगवान को भक्त की इच्छा पूरी करनी ही होती है।
सीख: यह प्रसंग निस्वार्थ भक्ति, अहंकार का त्याग, सेवाभाव और ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम को दर्शाता है, जहाँ केवट अपने सांसारिक लाभ से ऊपर उठकर प्रभु से जुड़ता है, जैसा कि KahaniPlace वेबसाइट पर बताया गया है।
यह संवाद तुलसीदास जी के रामचरितमानस के अयोध्या कांड में मिलता है, जो भारतीय संस्कृति और भक्ति का एक महत्वपूर्ण अंश है।
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