राधा आई तो यशोदा मैया का आँचल भर गया. राधाकृष्णन का गहरा प्रेम 🙏
Автор: Sanatan Stories
Загружено: 2025-12-30
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नंदगाँव की संध्या थी…
और बरसाने की नन्ही किशोरी के मन में एक मधुर भाव जाग उठा —
“एक बार नंद भवन जाकर यशोदा मैया से मिल आऊँ…”
संकोच से भरी, कोमल कदमों से चलती हुई
तीन साल की छोटी-सी किशोरी नंद भवन के द्वार पर पहुँची।
भीतर कन्हैया अपनी मैया से रूठे बैठे थे —
कभी बड़े होने की ज़िद,
तो कभी विवाह की बाल-सुलभ जिद्द।
जैसे ही द्वार पर किशोरी की मधुर वाणी गूँजी,
कन्हैया ने तुरंत पहचान लिया —
“मैया! मेरी बहू आ गई!”
यशोदा मैया ने द्वार खोला
तो मानो साक्षात लक्ष्मी स्वरूप नन्ही किशोरी सामने खड़ी थी।
मैया ने गोद में बैठाया,
लाला ने खुद श्रृंगार पेटी ला दी,
और नंद भवन प्रेम, ममता और आनंद से भर उठा।
यह लीला केवल बाल-कथा नहीं,
यह प्रेम की वह अनुभूति है
जहाँ राधा बिना बोले सब कुछ कह देती हैं
और कृष्ण बिना देखे सब कुछ समझ जाते हैं।
देखिए यह अनोखी, कोमल और भावपूर्ण
नंद भवन की बाल राधा-कृष्ण लीला
जो हृदय को शांति और प्रेम से भर देती है 🙏🌸
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