HIMALAYAN HIGHWAYS| रामलीला में मुख्य किरदार निभाती लड़कियां | राम-लक्ष्मण,सीता बनी लड़कियां| CHAMOLI
Автор: Himalayan Highways
Загружено: 2022-06-13
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HIMALAYAN HIGHWAYS/ हिमालयन हाइवेज।
सुदृर पहाड़ों में रामलीला मंचन की तस्वीरें आपके जेहन में जरूर होगी और हाल फिलहाल में आप रामलीला मंचन के कई मंचों के गवाह भी बने होंगे लेकिन इस एपिसोड के शुरुआत में हमने आपको जो तस्वीरें दिखाई है वो सुदृर क्षेत्रों में आपको रामलीला मंचन का अलग अनुभव लेकर आई है। नमस्कार हिमालयन हाइवेज के एक और एपिसोड में आपका स्वागत है। उत्तराखण्ड के सुदृर क्षेत्रों में जीवनशैली और लोकसंस्कृति से जुड़े एपिसोड हम आपको दिखाते आये है लेकिन आज हम आपके लिए लेकर आये है एक खास एपिसोड जो अपने आप मे बदलाव की कहानी समेटे हुए है। रामलीला मंचन में पुरुष कलाकारों को रामलीला के अलग अलग पात्रों के किरदार में आपने देखा होगा लेकिन आज हम आपको दिखाने जा रहे है चमोली जनपद के नारायणबगड़ विकासखण्ड में आयोजित एक रामलीला जिसमें मुख्य पात्रों का किरदार स्थानीय लड़कियों द्वारा निभाया जा रहा है।
नारायणबगड़ विकासखण्ड के मींग गांव में रामलीला का आयोजन छह दशकों से अधिक समय से होता आया है और हर बार की तरह मींग गांव में इस साल भी प्रभु राम की लीला मंचन का आयोजन किया गया। छह दशकों के इस सफर में पहली बार राम दरबार मे कुछ बदलाव नजर आया है और ये बदलाव मींग गांव की लड़कियों के जरिये लाया गया है जो एक सुखद अहसास दिला जाता है। पहाड़ों में रामलीला मंचन में लड़कियों की एंट्री कभी मुश्किल नजर आती हो लेकिन अब मुख्य किरदार में लड़कियों की प्रस्तुति हर किसी को हैरान कर रही है। बड़े महानगरों और शहरों में लड़कियों को मंच पहले से मिलता आया है लेकिन सुदृर क्षेत्रों में आज भी यह मुश्किल नजर आता है। मींग गांव में गठित रामलीला कमेटी ने पहली बार मुख्य किरदारों में लड़कियों को जगह दी जिसके बाद रामलीला का मंचन और भी आकर्षक नजर आता है। मींग गांव में आयोजित रामलीला में आधा दर्जन से अधिक लड़कियां अलग अलग किरदारों में अपने हुनर को दिखा रही है। राम लक्ष्मण सीता के किरदार भी लड़कियां अदा कर रही है। मींग गांव की रहने वाली ये सभी लड़कियां स्थानीय स्कूल कालेज में छात्राएं है और रामलीला आयोजन की घोषणा के वक्त तक इन्हें भी नही मालूम था की ये आने वाले सुखद बदलाव की मिसाल बनने वाली है। मंचन के दौरान अहंकारी रावण के सामने पूरी ताकत के साथ खड़ा होना हो, बलशाली मेघनाद को ललकारना या फिर कुम्भकर्ण की आंख में आंख डालकर लड़ना इन लड़कियों के लिए कुछ भी मुश्किल नजर नही आता।
रामलीला आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों के मुताबिक लड़कियों में नया सीखने की ललक ओर उनकी गम्भीरता के चलते उन्हें यह जिम्मेदारी दी गयी और इसके नतीजे काफी सुखद नजर आए है। उम्मीद से बढ़कर लड़कियों ने अपने किरदार के साथ न्याय किया जिससे भविष्य में यह सिलसिला बढ़ने का भरोषा जगा है ।पहाड़ों की जीवनशैली में समय समय पर महिलाओं और लड़कियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और रामलीला मंचन में बढ़ती लड़कियों की यह संख्या इसे साबित भी करती है। समय बदलाव का है और सुदृर पहाड़ों में अब यह बदलाव धरातल पर नजर आने लगा है। रामलीला में मुख्य किरदार निभा रही लड़कियां एक सामाजिक सन्देश भी देती है जो हर उस प्रतिभावान लड़की और अभिभावकों को सुनना चाहिए जो हुनर के बाद भी लड़कियों को सामाजिक ताने बाने का ताना देकर घर मे ही रहने को मजबूर करते आये है।
लड़कियों द्वारा रामलीला में मुख्य किरदारों के अभिनय करना आज के समय के हिसाब से ज्यादातर लोगों को ज्यादा प्रभावित न करें लेकिन यहां बात उन सुदृर क्षेत्रों की है जहां रामलीला में पुरुषों को ही मंचन का मौका मिलता आया है ऐसे में अपनी प्रतिभा से अपने लिए रास्ता तलाश कर रही ये लड़कियां आने वाला भविष्य है और सम्भव हो कि आने वाले समय मे अन्य जगहों आयोजित लीलाओं में लड़कियों की यह संख्या ज्यादा ओर असरदार रूप में नजर आएं।
हिमालयन हाइवेज के आज के एपिसोड में इतना ही। आपको हमारा यह एपिसोड कैसा लगा कृपया कमेंट कर जरूर बताएं साथ ही हमारे चैनल को सब्सक्राइब अवश्य करें।
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