कहाँ तो तय था चिरागॉं हरेक घर के लिए । गज़ल दुष्यंत कुमार । ncert class 11| gazal dushyant kumar
Автор: Gyansamagra
Загружено: 2021-01-18
Просмотров: 13701
कहाँ तो तय था चिरागॉं हरेक घर के लिए ।
कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए ।।
ग़ज़ल दुष्यंत कुमार । गजल class 11 ncert ।
gazal dushyant kumar | gazal class 11 |
kahan to tay thaa chiragana harek ghar ke liye.
kahan chirag mayassar nahin shahar ke lie.
#gazal_dushyant_kumar #kahan_to_tay_thaa_chiragan.
यहां दरख़्तों कर शाये में धूप लगती है।
चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए।
न हो कमीज तो पांवों से पेट ढक लेंगे।
ये लोग कितने मिनासिब हैं इस सफर के लिए।
खुदा नहीं ना सही आदमी का ख्वाब सही।
कोई हसीन नजारा तो है नजर के लिए।
वे मुतमईन कि पत्थर पिघल नहीं सकता।
मैं बेकरार हूँ आवाज में असर के लिए।
तेरा निजाम है सील दे जुबान शायर की।
ये ऐहतियात जरूरी है इस बहर के लिए।
जिऊं तो अपने बगीचे में गूलमोहर के तले।
मरूँ तो गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए।
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: