हंसावतार अवतरण दिवस 30.10.25 एवं माघ महोत्सव एकादशी 14 व 29.01.26 हंस तीर्थ यात्रा को निर्देश
Автор: Hans Bhagwan
Загружено: 2025-10-21
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श्री हंस भगवान के अवतरण दिवस कार्तिक शुक्ल नवमी / आंवला नवमी / अक्षय नवमी दिनांक 30.10.2025 एवं माघ महोत्सव के दौरान विशेषकर षट्तिला एकादशी दिनांक 14.01.2026 तथा जया एकादशी 29.01.2026 को भगवान विष्णु के हंस अवतार की जन्मभूमि पौराणिक हंस तीर्थ क्षेत्र ( हंस तीर्थ मंदिर, हंस कूप, संध्यावट वृक्ष, श्री संकष्टहर माधव - प्रयाग के नवें माधव, गुरु गोरखनाथ जी की तप:स्थली आदि ) प्रतिष्ठानपुर ( झूंसी - कोहना ), गंगा तट, कुंभ प्रयागराज, उ प्र के दर्शन - पूजन एवं परिक्रमा के उद्देश्य से जाने वाली पारंपरिक परिक्रमा यात्रा के संदर्भ में अपना आशीर्वचन देते हुए पूज्य आचार्य प्रवर राम शंकर शुक्ल जी महाभाग ।
पूज्य आचार्य प्रवर राम शंकर शुक्ल जी महाभाग द्वारा पौराणिक हंस तीर्थ क्षेत्र में स्थित पवित्र संध्यावट वृक्ष के नीचे संध्यावंदन एवं गायत्री अनुष्ठान तथा पौराणिक हंस तीर्थ मंदिर एवं हंस कूप के जल से तर्पण निवास इत्यादि संबंधित प्रकल्प किए जा चुके हैं।
हंस तीर्थ क्षेत्र में निवास करते हुए संध्यावट वृक्ष के नीचे त्रिकाल संध्या करने से व्रात्य संज्ञा का निवारण होता है आचार्यों का पवित्र हंस तीर्थ क्षेत्र को पुनः उद्भाषित करने हेतु आवाहन
पूज्य धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज , पूर्वाचार्य स्वामी निरंजनदेव तीर्थ जी महाराज , वैष्णव संत पूज्य संत श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी महाभाग के पावन सानिध्य में प्रयाग पंचकोशीय परिक्रमा के दौरान पौराणिक हंस तीर्थ क्षेत्र में श्रद्धालुजन निवास पूजन संध्या इत्यादि का प्रकल्प करते एवं कराते रहे हैं ।
आओ हम सब मिलकर पौराणिक हंस तीर्थ क्षेत्र चलें
ऊर्जे सिते नवम्याम् वै हंसो जात: स्वयं हरि:_ गोपाल तापन्योपनिषद्
सतयुग के युगादि तिथि कार्तिक शुक्ल नवमी जिसे अक्षय नवमी अथवा आंवला नवमी के रूप में भी मनाया जाता है भगवान श्री हरि विष्णु स्वयं हंस अवतार के रूप में अवतरित हुए थे।
हंस स्वरूप्यवददच्युत आत्मयोगं _ भागवत पु. (एकादश स्कंध 12/17)
भगवान विष्णु ने हंस आदि स्वरूप में आत्मज्ञान ब्रह्म विद्या प्रदान किया।
तस्याहं हंसरूपेण सकाशगमं तथा ।। भागवत पु. (एकादश स्कंध 13/19)
भगवान विष्णु ने हंस अवतार लेकर हंस गीता तथा गोपाल मंत्रराज का उपदेश देकर पुनः हंस रूप में ही आकाश की ओर गमन करते हैं ।
उत्तरेण प्रतिष्ठानाद् भागीरथ्यास्तु पूर्वत:। हंसप्रपतनम् नाम तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम् ।। मत्स्य.पु.(106/32), कूर्म पु.(35/23)
अर्थात् प्रतिष्ठानपुर - पुरानी झूंसी (झूंसी - कोहना) के उत्तरी भाग में एवं भागीरथी मां गंगा के पूर्वी तट पर हंस प्रपतन नामक तीर्थ (हंस = भगवान विष्णु के हंस अवतार, प्रपतन = प्र + पतन = उतरना / नीचे आना / अवतरित होना अर्थात् भगवान विष्णु के हंस अवतार की जन्मभूमि पौराणिक हंस तीर्थ क्षेत्र ) तीनों लोगों में विख्यात है।
अश्वमेधफलं तस्मिन् स्नानमात्रेण भारत । यावच्चन्द्रश्च सूर्यश्च से तावत् स्वर्गे महीयते ।। मत्स्य पु.(106/33), कूर्म पु.(35/24)
अर्थात् जो मनुष्य पौराणिक हंस तीर्थ क्षेत्र में रहते हुए हंस कूप के जल से स्नान मात्र कर लेता है उसे अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है एवं जब तक सूर्य और चंद्रमा रहते हैं उसे स्वर्ग में प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
कूपं चैव तु तत्रास्ति प्रतिष्ठानेतिविश्रुतम। तत्र स्नात्वा पितृन्देवान्संतार्प्य यतमानस:।। ना.पु.उ.खं. (63/93)
प्रतिष्ठानपुर झूंसी में एक प्राचीन कूप (हंस कूप) है जिसके जल से स्नान करने से एवं पितरों को तर्पण इत्यादि की क्रिया करने से उन्हें उर्ध्वगामी गति की प्राप्ति होती है।
अथ संध्यावटे रम्ये ब्रह्मचारी जितेन्द्रिय: उपवासी शुचि: संध्यां ब्रम्हलोकमवाप्नुयात् ।। मत्स्य पु. (106/43) कूर्म पु. (35/27)
अर्थात् रमणीय पवित्र श्री संध्यावट तीर्थ की छाया में जो मनुष्य ब्रम्हचर्य पूर्वक जितेंद्रिय एवं निराहार रहकर पवित्र भाव से संध्योपासन (त्रिकाल संध्या) करता है वह ब्रह्म लोक को प्राप्त होता है।
तथापि वर्तते संध्या वटाधस्तस्यचाश्रम: । तस्मिन्वसति धर्मात्मा संकष्टहरमाधव: ।। प्रयाग शताध्यायी (75/38)
फिर भी संध्यावट के नीचे श्री संकष्टहर माधव का आश्रम है वही धर्मात्मा संकष्टहरमाधव रहते है।
तस्माद् द्विजवरा: सर्वे गत्वा संध्यावटान्तिके । संध्यामुपास्यविधिवत् पूजयन्ति च माधवम् ।। (75/42)
इसलिए सभी द्विजश्रेष्ठ संध्यावट के समीप जाकर विधिवत् संध्योपासन करते हैं और माधव क पूजन करते हैं।
एवं संध्यावटं प्रार्थ्यं मुच्यन्ते लोपपातकात् । प्रसन्नश्चा भवत्तेषां संकष्टहरमाधव: ।। (75/44)
इस प्रकार संध्या वट की प्रार्थना करने पर संध्या लोप का पाप छूट जाता है और संकष्टहर माधव प्रसन्न हो जाते हैं।
हंसप्रपतनं परम् । गवां कोटिप्रदानाधद्यत्त्र्यहं स्नानस्य तत्फलम्।। अग्नि पु. (111/10) प्रतिष्ठानपुर (झूंसी कोहना) में हंस तीर्थ क्षेत्र है। करोड़ों गायों के दान करने से जो फल प्राप्त होता है वही फल यहां पर 3 दिन हंस तीर्थ क्षेत्र में निवास करते हुए हंस कूप के पवित्र जल से स्नान करने से होता है।
उर्वशीपुलिनं रम्यं तीर्थं संध्यावटस्तथा ।। अग्नि पु (111/13)
उर्वशी रम्ये पुलिने हंस पाण्डुरे। कूर्म पु. (35/25), मत्स्य पु. (106 /34)
जनपद प्रयागराज के पंचकोशीय, द्वादश माधव एवं बहिर्वेदीय परिक्रमा स्थल भगवान विष्णु के हंस अवतार की जन्मभूमि पौराणिक हंस तीर्थ क्षेत्र [ हंस तीर्थ मंदिर, हंस कूप, संध्यावट वृक्ष एवं संकष्टहर माधव (प्रयाग के नवें माधव), गुरु गोरखनाथ आदि तपस्वियों की तप:स्थली आदि ] प्रतिष्ठानपुर (झूंसी-कोहना), गंगा तट, कुम्भ मेला क्षेत्र, प्रयागराज, उ. प्र. के पवित्र भूमि पर हो रहे अराजक तत्वों के अतिक्रमण को हटाकर संरक्षित करते हुए पौराणिक माहात्म्य के अनुरूप दर्शन - पूजन एवं परिक्रमा के समुचित प्रबंधन सुनिश्चित करें।
🦢🔔पौराणिक हंस तीर्थ क्षेत्र के रक्षार्थ पंच सूत्रीय निवेदन🔔🦢
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