LIVE | सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ | Sampurn SunderKand with Lyrics |
Автор: Sashi Bats
Загружено: 2025-11-21
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सुंदरकांड रामचरित मानस का पांचवां अध्याय है, जो भगवान हनुमान की वीरता, भक्ति और बुद्धिमत्ता पर केंद्रित है। इसमें हनुमान जी द्वारा समुद्र पार कर लंका की यात्रा, सीता की खोज, लंका दहन और वापसी की घटनाओं का वर्णन है। इस पाठ को किसी भी जीवन की बाधा को दूर करने और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
सुंदरकांड का महत्व
यह रामचरित मानस का एकमात्र ऐसा भाग है जिसमें भगवान राम के बजाय उनके भक्त हनुमान की विजय का वर्णन है, इसलिए इसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसे जीवन में आने वाली बाधाओं, शत्रुओं और परेशानियों को दूर करने के लिए लाभकारी माना जाता है।
शनिवार और मंगलवार को इसका पाठ करना विशेष फलदायी होता है।
इसका पाठ करने से शनि और मंगल के प्रतिकूल प्रभाव भी कम होते हैं।
सुंदरकांड क्यों कहलाता है 'सुंदर'?
यह नाम हनुमान जी द्वारा की गई वीर और सुंदर यात्रा से जुड़ा है।
लंका में जिस पर्वत पर हनुमान जी ने छलांग लगाई थी, उसका नाम 'सुंदर पर्वत' था और यहीं पर सीता जी की अशोक वाटिका थी।
हनुमान जी ने रावण के सोने की लंका को अपनी पूंछ से जलाया, जिससे यह घटना और भी सुंदर और अविस्मरणीय बन गई।
सुंदरकांड का पाठ कैसे करें
शनिवार या मंगलवार को शाम के समय इसका पाठ करें।
हनुमान जी के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
हनुमान जी को लाल फूल और मिठाई का भोग लगाएं।
पाठ के अंत में हनुमान जी की आरती करें और प्रसाद बांटें।
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