फिर मिलेंगे ये कहके जुदा होइए | Heart Touching Poetry by Alok Vatsa
Автор: Vatsalyrics
Загружено: 2025-12-19
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प्रस्तुत है एक दिल को छू लेने वाली रचना "फिर मिलेंगे ये कहके जुदा होइए"। यह गज़ल बिछड़ने, उम्मीद और रिश्तों की अहमियत को बहुत खूबसूरती से बयां करती है।
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✍️ Credits:
Lyrics (शब्द): Alok Vatsa (आलोक वत्स)
Genre: Hindi Ghazal / Poetry
📜 Lyrics (शब्द):
फिर मिलेंगे ये कहके जुदा होइए फिर मिलेंगे ये कहके जुदा होइए फिर मिलेंगे ये कहके जुदा होइए क्यूँ यकायक भला गुमशुदा होइए फिर मिलेंगे ये कहके जुदा होइए
मिलके कहने से मिट जाए नाराज़गी मिलके कहने से मिट जाए नाराज़गी मिलके कहने से मिट जाए नाराज़गी इस तरह ही किसी से ख़फ़ा होइए फिर मिलेंगे ये कहके जुदा होइए क्यूँ यकायक भला गुमशुदा होइए फिर मिलेंगे ये कहके जुदा होइए
आपके रंज मेरे सर-आँखों पर आपके रंज मेरे सर-आँखों पर आपके रंज मेरे सर-आँखों पर ये सही तो नहीं कि बेवफ़ा होइए फिर मिलेंगे ये कहके जुदा होइए क्यूँ यकायक भला गुमशुदा होइए
फिर मिलेंगे ये कहके जुदा होइए क्यूँ यकायक भला गुमशुदा होइए फिर मिलेंगे ये कहके जुदा होइए
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